नई दिल्ली,
अप्रैल महीने में देश का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 8.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस दौरान कुल GST संग्रह ₹.2,42,702 करोड़ रहा, जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है। वैश्विक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद राजस्व संग्रह में मजबूत वृद्धि देखी गई।
पिछले महीने शुद्ध GST राजस्व ₹.2,10,909 करोड़ रहा, जिसमें 7.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि रिफंड को समायोजित करने के बाद सामने आई है। रिफंड की बात करें तो इस दौरान इसमें 19.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह बढ़कर ₹.31,793 करोड़ तक पहुँच गया। इससे शुद्ध राजस्व पर आंशिक दबाव देखने को मिला, लेकिन कुल संग्रह मजबूत बना रहा।
आयात से जुड़े राजस्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। सकल आयात कर राजस्व 25.8 प्रतिशत बढ़कर ₹.57,580 करोड़ हो गया। वहीं घरेलू राजस्व 4.3 प्रतिशत बढ़कर ₹.1.85 लाख करोड़ तक पहुँच गया। मार्च महीने में भी GST संग्रह 8.8 प्रतिशत बढ़कर ₹.2 लाख करोड़ से अधिक रहा था, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग ₹.1.83 लाख करोड़ था।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल GST संग्रह ₹.22.27 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹.20.55 लाख करोड़ की तुलना में 8.3 प्रतिशत अधिक है। यह आर्थिक गतिविधियों में स्थिरता और उपभोग में वृद्धि को दर्शाता है। शुद्ध GST राजस्व भी वित्त वर्ष के दौरान बढ़कर ₹.19.34 लाख करोड़ हो गया, जिसमें 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
मार्च महीने में रिफंड 13.8 प्रतिशत बढ़कर ₹.22,074 करोड़ तक पहुँच गया, जिसमें घरेलू रिफंड में 31.2 प्रतिशत की तेज वृद्धि देखी गई। इससे कर अनुपालन और प्रोसेसिंग में सुधार का संकेत मिलता है। हालांकि इस अवधि में उपकर (cess) संग्रह में गिरावट देखी गई और यह ₹(-177) करोड़ पर पहुँच गया, जिसका मुख्य कारण अधिक रिफंड और समायोजन बताया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार GST संग्रह में यह वृद्धि देश की अनुमानित लगभग 7 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के अनुरूप है, जो खपत, आयात और अनुपालन में सुधार को दर्शाती है। Stock Market के संदर्भ में, GST संग्रह में यह मजबूती आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देती है, जिसका असर भविष्य में Nifty और Sensex जैसे प्रमुख सूचकांकों पर भी देखने को मिल सकता है।

