जून महीने में शाकाहारी थाली की कीमत औसतन १० फीसदी तक बढ़ गई है। प्याज, टमाटर और आलू की कीमतों में आई तेजी इसकी प्रमुख वजह रही है। जून माह में आलू, प्याज और टमाटर की कीमत में काफी तेजी आई है। इससे आम लोगों की रसोई का भी बजट बिगड़ गया है, क्योंकि सभी घरों में सबसे ज्यादा इन्हीं सब्जियों का इस्तेमाल होता है। पर अब सब्जियों की ऊंची कीमत से परेशान आम लोगों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार का कहना है कि मानसून की अच्छी बारिश होने से आलू, प्याज और टमाटर की कीमतों में कमी आएगी। कृषि मंत्रालय के आंकलन के अनुसार, प्रमुख सब्जियों जैसे प्याज, टमाटर और आलू की खरीफ बुवाई के लिए लक्षित रकबे में पिछले साल की तुलना में बढ़ोतरी हुई है। नई फसल के आने से कीमतों में गिरावट आएगी। सरकार का कहना है कि घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता की स्थिति संतोषजनक है और खुदरा कीमतें स्थिर हो रही हैं। वहीं उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि खरीफ मौसम में प्याज की फसलों की बुवाई में 27 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है। मंत्रालय ने कहा कि इस साल अच्छी और समय पर मानसूनी बारिश ने प्याज, टमाटर और आलू सहित अन्य बागवानी फसलों को बढ़ावा दिया है। पिछले साल के उत्पादन की तुलना में रबी-2024 के मौसम में प्याज के उत्पादन में मामूली कमी के बावजूद घरेलू बाजार में प्याज उपलब्धता की स्थिति संतोषजनक है। सरकार ने प्याज की फसल के संबंध में कहा कि रबी-2024 में अनुमानित 191 लाख टन का उत्पादन, प्रति माह लगभग 17 लाख टन की घरेलू खपत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। निर्यात प्रति माह एक लाख टन आंका गया है। धीरे-धीरे प्याज की कीमतें स्थिर हो रही हैं क्योंकि बाजार में रबी प्याज की आवक बढ़ रही है। मांनसूनी बारिश शुरू हो रही है, जिससे उच्च वायुमंडलीय नमी के कारण भंडारण नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। इससे किसान बाजार में फसल ला रहे हैं। आलू के बारे में सरकार ने कहा कि सितंबर से नवंबर के दौरान खरीफ आलू की फसल बाजार में उपलब्धता बढ़ाती है। टमाटर के बारे में सरकार ने कहा कि आंध्र प्रदेश के चित्तूर और कर्नाटक के कोलार के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल की स्थिति अच्छी बताई गई है। कोलार में टमाटर की तुड़ाई शुरू हो गई है और अब से कुछ दिनों में बाजार में आ जाएगी।

