बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर तकनीकी शिक्षा और सतत विकास को एक मंच पर लाने की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल करते हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आईसेटेस 2025 का आयोजन 18 और 19 अप्रैल को जयपुर इंजीनियरिंग कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर (JCRC) में भव्य रूप से संपन्न हुआ। यह दो दिवसीय आयोजन शिक्षा, शोध और नवाचार में रुचि रखने वाले देश-विदेश के विद्वानों, विद्यार्थियों और प्रबुद्धजनों का केंद्र बन गया।
सम्मेलन का उद्घाटन डॉ. टी.एन. नागभूषण, कुलपति, किश्किंधा विश्वविद्यालय, कर्नाटक ने किया। उन्होंने कहा कि आज की तकनीकी शिक्षा केवल विषय ज्ञान नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व भी होना चाहिए। उन्होंने परिणाम आधारित शिक्षा और शिक्षण के मूल में सतत विकास को आवश्यक बताया। इसके पश्चात प्रोफेसर ए.के. नायक, डॉ. मेघांशु वशिष्ठ, डॉ. अमित जोशी और डॉ. इमैनुएल शुभाकर जैसे विद्वानों ने शिक्षा व्यवस्था में नवाचार, तकनीकी पाठ्यक्रमों में बदलाव और टिकाऊ सोच को लेकर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा सिर्फ डिग्री नहीं, दूरदृष्टि और दायित्व के साथ शिक्षा प्राप्त करें। सम्मेलन में विदेशों से जुड़े विशेषज्ञों ने भी ऑनलाइन माध्यम से अनुभव साझा किए। रोमानिया, रूस, अमेरिका, थाईलैंड और जर्मनी जैसे देशों के विद्वानों ने अपने-अपने देशों में तकनीकी शिक्षा में हो रहे सकारात्मक बदलावों और सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इस सम्मेलन में सौ से अधिक शोध प्रस्तुत किए गए। शिक्षा की बदलती दिशा, तकनीकी प्रगति, सतत विकास और विज्ञान के अनुप्रयोग जैसे विषयों पर केंद्रित शोध पत्रों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कई श्रेष्ठ शोध प्रकाशन के लिए चयनित किए गए हैं, जिससे शोधकर्ताओं को वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी। समापन सत्र में संस्थान के प्राचार्य डॉ. विनय कुमार चंडना ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि यह एक विचार यात्रा थी — जिसमें शिक्षा, शोध और समाज को साथ लाने का प्रयास हुआ। उन्होंने सभी सहभागियों का आभार जताते हुए कहा कि इस मंच ने नई सोच, सहयोग और सतत भविष्य के लिए प्रेरणा दी है।
आईसेटेस 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब शिक्षा संस्थान केवल पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि सोच और दिशा प्रदान करते हैं, तब वे समाज के विकास में भागीदार बनते हैं। विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए यह सम्मेलन एक प्रेरणास्रोत बना, जो आने वाले समय में तकनीकी शिक्षा को अधिक समावेशी और उत्तरदायी बनाएगा।

