Tuesday, June 30, 2026 |
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चीन और भारत के बीच बढ़ते दोस्ती के हाथ

by Business Remedies
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punit jain

रूस के कजान शहर में पिछले दिनों हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग के बीच हुई वार्ता से लगता है दोनों देशों के बीच कुछ मामलों में सहमति के संकेत मिले हैं। इससे लगता है कि चीन ने भारत के साथ दोस्ती के हाथ बढ़ाए हैं। वहीं इसके बाद 11वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान पिछले दिनों ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की लाओस के ‘वियनतियाने’ में चीन के रक्षा मंत्री ‘डोंग जुन’ के साथ उच्च स्तरीय बैठक हुई है। यह पूर्वी लद्दाख में पिछले 2 टकराव बिंदुओं से भारतीय तथा चीनी सैनिकों की वापसी पूरी होने के बाद दोनों रक्षा मंत्रियों की पहली बैठक थी। इसमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देश पड़ोसी हैं और पड़ोसी रहेंगे, लिहाजा हमें टकराव से अधिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। इसके अगले ही दिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ब्राजील के रियो डी जिनेरियो में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हुई, जिसमें दोनों नेताओं मेें पिछले 5 वर्षों से बंद मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू करने तथा भारत और चीन के बीच सीधी विमान सेवाएं शुरू करने जैसे मुद्दोंं पर बातचीत हुई। इसी बीच अगले वर्ष रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। अमरीका में चाहे किसी भी पार्टी का राष्ट्रपति आए, वह चीन को रोकने की कोशिश करता ही है और अब दूसरी बार अमरीका का राष्ट्रपति चुने जाने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने तो पहले ही चीन से आयात किए जाने वाले सामान पर भारत से भी अधिक टैरिफ बढ़ाने का संकेत दे दिया है। इससे ऐसा लग रहा है कि डोनाल्ड ट्रम्प चीन के विरुद्ध टैरिफ बढ़ा देंगे। चीन को केवल कच्चा माल खरीदने वालों की नहीं बल्कि सामान खरीदने की क्षमता वाले लोगों से युक्त एक बाजार और एक नए साथी की जरूरत पड़ेगी और ऐसे में भारत उसके लिए उपयुक्त है। भारत का मध्यम वर्ग विश्व में सबसे बड़ा होने के कारण चीन कोशिश कर रहा है कि भारत, चीन और रूस का एक गठबंधन बन जाए ताकि ये तीनों देश मिलकर जनसंख्या तथा आर्थिकता के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएं। निस्संदेह चीन के साथ जाने में हमारा लाभ भी है, क्योंकि अमरीका का राष्टï्रपति बनकर आने वाले हर नेता की भारत के प्रति नीतियां ऊपर से तो ठीक रहती हैं परंतु बीच में वे कुछ न कुछ गड़बड़ कर ही देते हैं। इसलिए हमारे लिए तटस्थ रहना और अमरीका के साथ-साथ चीन और रूस से मित्रता रखना लाभदायक है।



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