बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। Prime Minister Narendra Modi ने कहा कि गति और पैमाने के साथ किये गये कार्यों से भारत को पिछले 10 साल में अपनी सौर ऊर्जा क्षमता 32 गुना बढ़ाने में मदद मिली है। इसके साथ देश 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के अपने लक्ष्य को हासिल करने करने की दिशा में बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सौर महोत्सव में अपने वीडियो संदेश में कहा, ‘‘देश ने पिछले कुछ साल में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाये हैं। हम नवीकरणीय ऊर्जा में पेरिस प्रतिबद्धताओं को हासिल करने वाले जी-20 में पहला देश थे।’’
उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण यह संभव हो पाया है। मोदी ने कहा, ‘‘पिछले दस वर्षों में हमारी सौर ऊर्जा क्षमता 32 गुना बढ़ गई है। यह गति और पैमाना हमें 2030 तक 500 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) हरित ऊर्जा क्षमता हासिल करने में भी मदद करेगा।’’ मोदी ने यह भी सुझाव दिया कि हरित ऊर्जा निवेश में असंतुलन को दूर करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों की मदद के लिए विनिर्माण और प्रौद्योगिकी को लोकतांत्रिक बनाने की जरूरत है, अल्प विकसित देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को सशक्त बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मोदी ने कहा कि सौर परिवेश के विकास के लिए हाशिए पर रहने वाले समुदायों और युवाओं को शामिल करना महत्वपूर्ण है। सौर ऊर्जा के महत्व को समझाने के लिए वेदों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘वेदों की रचना हजारों साल पहले की गई थी।
वेदों के सबसे लोकप्रिय मंत्रों में से एक सूर्य के बारे में है। आज भी, लाखों भारतीय रोजाना इसका जाप करते हैं। दुनियाभर में कई संस्कृतियां अपने तरीके से सूर्य की अराधना करती हैं। ज्यादातर क्षेत्रों में सूर्य से संबंधित त्योहार भी मनाये जाते हैं।’’ उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय सौर महोत्सव सूर्य के प्रभाव का जश्न मनाने के लिए पूरी दुनिया को एक साथ लाता है।
यह एक ऐसा महोत्सव है जो हमारी पृथ्वी को एक बेहतर ग्रह बनाने में मदद करेगा। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) का दो दिन का अंतर्राष्ट्रीय सौर महोत्सव बृहस्पतिवार को शुरू हुआ। पीएम मोदी ने कहा, ‘‘अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) 2015 में एक छोटे से रूप में शुरू हुआ था। यह उम्मीद और आकांक्षा का क्षण था। आज, यह नीति और कार्रवाई को प्रेरित करने वाले एक विशाल वृक्ष के रूप में विकसित हो रहा है।’’ इतने कम समय में आईएसए के सदस्यों की संख्या 100 देशों तक पहुंच गई है।

