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बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर
डॉक्टर बनना सबसे अधिक मांग वाले व्यवसायों में से एक है, जिसके लिए न केवल चिकित्सा विशेषज्ञता बल्कि अपार भावनात्मक शक्ति की भी आवश्यकता होती है। चुनौतियाँ कई हैं: लंबे घंटे, रोगियों का अधिक भार, चिकित्सा प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए निरंतर पढ़ाई की जरूरत, जीवन रक्षक निर्णय लेने का दबाव और रोगियों की पीड़ा से निपटने का भावनात्मक बोझ। फिर भी, जो चीज डॉक्टरों को आगे बढ़ाती है, वह है उनके पेशे, रोगियों और उनके काम में उनके द्वारा पाई जाने वाली उद्देश्य की गहन भावना के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता।
वे स्वास्थ्य सेवक, बीमारियों से लडऩे, चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाने और रोगी परिणामों में सुधार करने में सबसे आगे हैं। ङ्ख॥ह्र की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में लगभग 9.2 मिलियन डॉक्टर हैं, जिनमें से प्रत्येक वैश्विक स्वास्थ्य मानकों को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। भारत में, प्रत्येक डॉक्टर के जीवन को पहचानने और मनाने के लिए हर साल 1 जुलाई को पूरे देश में राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, डॉक्टरों की भूमिका प्रौद्योगिकी और चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के साथ विकसित होती रहेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेलीहेल्थ और व्यक्तिगत चिकित्सा, रोगी देखभाल के एकीकरण को परिभाषित करेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवा अधिक सुलभ और कुशल बन जाएगी।
डॉ. पंकज आनंद, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर रोगी के भरोसे और उपचार से मिलने वाली संतुष्टि की गहन भावना को साझा करते हैं। वे कहते हैं ‘जब कोई इंसान अपने शरीर को ठीक करने के लिए मुझ पर पूरी तरह से भरोसा करता है, तो मैं जो कृतज्ञता महसूस करता हूँ, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। मेरे द्वारा किये गए इलाज के बाद उन्हें ठीक होते देखना मुझे धन्य व भाग्यशाली महसूस कराता है।
डॉ. राहुल सिंघल, एडिशनल डायरेक्टर कार्डियोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर अपने पेशे की चुनौतियों और पुरस्कारों के बारे में बात करते हैं। ‘हर दिन एक चुनौती है क्योंकि मैं दिल के इलाज की बहुत बड़ी जिम्मेदारी का सामना करता हूं, जो जीवन का सार है। कई बाधाओं के बावजूद मरीज को बेहतर होते देखना, रिश्तेदारों के चेहरों पर मुस्कान और हर किसी के चेहरे पर संतुष्टि के भाव मुझे बहुत राहत देते हैं। मुझे एहसास होता है कि चुनौतियों का सामना अच्छे दिल से किया जा सकता है। इसलिए अपने दिल का ख्याल रखें क्योंकि दिल ही धडक़न है’।
डॉ. स्मिता वैद, एडिशनल डायरेक्टर प्रसूति एवं स्त्री रोग, फोर्टिस हॉस्पिटल कहती हैं, ‘डॉक्टर्स डे पर, हम न केवल चिकित्सा के विज्ञान का जश्न मनाते हैं, बल्कि उपचार की कला का भी जश्न मनाते हैं। दूसरों की देखभाल करना हमारा कर्तव्य और विशेषाधिकार है, और हम जिस भी मरीज की मदद करते हैं, वह हमारी ताकत व करुणा का प्रमाण है जो हमारे पेशे को परिभाषित करता है।’

