हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज विश्व शाकाहारी दिवस मनाया जाएगा। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को शाकाहारी भोजन के लाभों के प्रति जागरूक करना और एक ऐसे खान-पान को बढ़ावा देना है, जो स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीव-जगत के प्रति संवेदनशील हो। आज के समय में जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, तब शाकाहारी भोजन की उपयोगिता और भी महत्वपूर्ण हो गई है। आधुनिक युग में शाकाहारी जीवनशैली अपनाना केवल एक व्यक्तिगत पसंद ही नहीं, बल्कि वैश्विक आवश्यकता बन गई है। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से जूझ रही है, तब शाकाहारी होना हमारे और हमारी धरती दोनों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। यह सिर्फ खानपान की आदत नहीं, बल्कि एक बेहतर और संवेदनशील भविष्य की ओर उठाया गया एक जिम्मेदार कदम है। इस दिवस की नींव 1977 में नॉर्थ अमेरिकन वेजीटेरियन सोसाइटी की ओर से रखी गई थी और वर्ष, 1978 में इंटरनेशनल वेजिटेरियन यूनियन ने इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी। तब से लेकर आज तक यह दिन शाकाहार के प्रचार-प्रसार और इसके जरिए जीवों पर दया दिखाने के संकल्प का प्रतीक बन गया है। शाकाहारी भोजन में फल, सब्जियां, अनाज, दालें, मेवे और बीज जैसे पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। यह शरीर को आवश्यक विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटी ऑक्सिडेंट प्रदान करता है। संतुलित शाकाहारी आहार हृदय रोग, मोटापा, उच्च रक्तचाप और कई अन्य जीवनशैली संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है। हालांकि, स्वस्थ रहने के लिए आहार में सभी आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक ओर जहां बढ़ता प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव और पर्यावरणीय चुनौतियां आज पूरी दुनिया के सामने बड़ी समस्या हैं। पौधों पर आधारित भोजन अपनाने से प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है। नियमित और संतुलित शाकाहारी भोजन ऊर्जा बनाए रखने और बेहतर जीवनशैली अपनाने में मदद कर सकता है।

