Wednesday, September 30, 2026 |
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भारत की वनस्पति विरासत का संरक्षण कर रहा पतंजलि, अब तक 27 हजार से अधिक नमूने संरक्षित और 100+नए पादप रिकॉर्ड

by Business Remedies
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–राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली से लेकर हिमालयी क्षेत्रों और भारत के मैदानी भागों का पादप सर्वेक्षण

–आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व में वनस्पतियों की पहचान और संरक्षण को मिल रही है नई ऊंचाई

–दुनिया को 2024 में कैम्पेन्यूला डेन्सीसिलिएटा के रूप में दे चुका है नई पादप प्रजाति

–राज्यों से मिले कई नई पादप प्रजातियों का अध्ययन कर रहा है पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन

हरिद्वार। विज्ञान की दुनिया में कुछ उपलब्धियां शोर नहीं मचातीं, पर अपना काम बखूबी करती जाती हैं। इन्हीं में से एक नाम है पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन (PRF)। जहां के वैज्ञानिक भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पादप अन्वेषण का कार्य करते हुए अब तक देश के कई राज्यों से 100 से अधिक पादप भारत और भारतीय राज्यों के वनस्पति अभिलेख में दर्ज किए हैं। सर्वेक्षण और अनुसंधान के द्वारा पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन में अब तक 27 हजार से अधिक पादपों के नमूनों को patanjaliपतंजलि पादपालय ((हरबेरियम) में संरक्षित किया गया है। वैज्ञानिकों ने देश में पहली बार भारत के राष्ट्रपति भवन सहित कई राज्यों के नए पादप अभिलेख दर्ज कर वैज्ञानिक जगत में अपना लोहा भी मनवाया और दुनिया को 2024 में कैम्पेन्यूला डेन्सीसिलिएटा के रूप में नई पादप प्रजाति दी। इसके अलावा राज्यों से मिले कई नए पादप प्रजातियों का पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन अध्ययन भी कर रहा है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और आयुर्वेद शिरोमणि डॉ. आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पीआरएफ के वैज्ञानिक नित नये आयाम गढ़ रहे हैं। देश के कई राज्यों में सर्वेक्षण और अनुसंधान का कार्य पीआरएफ की ओर से लगातार जारी है। बीते कुछ सालों में पीआरएफ ने एक नहीं बल्कि कई उपलब्धियां हासिल की हैं। पहली बार भारत के राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली सहित हरियाणा, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल में सर्वेक्षण करते हुए अनेक पादपों को राज्यों के पादप अभिलेख में दर्ज किया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसे 100 से अधिक नए पादप अभिलेख अब तक पीआरएफ के वैज्ञानिकों ने खोज कर देश ही नहीं दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। इस कार्य को क्यू बोटानिकल गार्डेन के डिजिटल डेटा बेस और ऑनलाइन पोर्टल में भी स्थान दिया गया है।

पतंजलि की पादप सर्वेक्षण और संरक्षण की यात्रा

आचार्य बालकृष्ण ने अष्टवर्ग के पादपों की खोज, पहचान के साथ हरबेरियम का निर्माण करते हुए अष्टवर्ग रहस्य पुस्तक हिंदी और अंग्रेजी में प्रकाशन भी किया। पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन के वैज्ञानिकों ने हरियाणा के मोरनी हिल्स से कई पादप प्रजातियों को राज्य के पादप अभिलेख में दर्ज किया। उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्रों के सर्वे के दौरान जनजातीय लोगों की ओर से प्रयोग की जाने वाले पादपों को भी अभिलेख किया है।

नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अंतर्गत पीआरएफ के वैज्ञानिकों ने 2023-24 में गोमुख से गंगासागर तक गंगा के दोनों किनारों में पादप सर्वेक्षण का महत्वपूर्ण कार्य किया। इस कार्य के अंतर्गत अनेक पादपों को राज्यों के पादप अभिलेखों में दर्ज किया। भारत के राष्ट्रपति भवन में पहली बार पतंजलि के वैज्ञानिकों ने 620 से अधिक पौधों को रिकार्ड किया और 2 नवंबर 2025 को स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में फ्लोरा ऑफ राष्ट्रपति भवन और मेडिसिनल प्लांट्स ऑफ राष्ट्रपति भवन नामक दो पुस्तकों का विमोचन भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया। इस कार्य को करते हुए दिल्ली के पादपों की एक चेकलिस्ट भी प्रकाशित की। उत्तर पूर्व के अरुणाचल प्रदेश के पाके-कसांग जिले के अंतर्गत सिजोसा क्षेत्र का भी सर्वे किया गया। जिसके तहत अनेक पादप भारत और राज्य के वनस्पति अभिलेख में दर्ज किए गए।

प्रगति में है हरिद्वार जिले के पादप सर्वेक्षण का कार्य

स्वामी रामदेव के संरक्षण और आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक कुंभ नगरी हरिद्वार का पादप सर्वेक्षण कर रहे हैं। जिसके तहत फ़्लोरा ऑफ हरिद्वार का कार्य प्रगति पर है और इस कार्य को भी करते हुए उत्तराखंड के पादप अभिलेख में भी अनेक पौधों को दर्ज किया गया है।

हमारे लिए नई पादप प्रजातियां और नए अभिलेखों की खोज केवल वैज्ञानिक उपलब्धि ही नहीं है। बल्कि यह जैव विविधता संरक्षण, औषधीय पौधों की पहचान, पर्यावरणीय अध्ययन और भविष्य के वानस्पतिक अनुसंधान की मजबूत आधारशिला भी है। प्रत्येक नई खोज भारत की प्राकृतिक विरासत को वैज्ञानिक रूप से बढ़ाती है। जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी ज्ञान-संपदा तैयार हो सके। पीआरएफ उच्च मानदंडों पर कार्य कर रहा है और यहां के वैज्ञानिक अखंड-प्रचंड पुरुषार्थ कर रहे हैं, जिसके बाद मिली उपलब्धि पर हमें भी गर्व होता है। पतंजलि का यह अनुसंधान कार्य देश के गौरव को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

आचार्य बालकृष्ण, महामंत्री पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार



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