केंद्र की पीएलआई योजना से आयात पर निर्भरता कम करने में मिली मदद
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं भारत के फार्मास्युटिकल, बल्क ड्रग्स और मेडिकल डिवाइस विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करने में सफल रही हैं। इससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है और फार्मा तथा मेडटेक क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता विकसित करने के लिए तकनीक अपनाने को बढ़ावा मिला है।
विनिर्माण के लिए 39 परियोजनाएं शुरू हो चुकी है
सरकार ने 2020 में ‘बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना’ को मंजूरी दी थी, जिसके लिए कुल 6,940 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रावधान किया गया। इस योजना का उद्देश्य चिन्हित 41 महत्वपूर्ण उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना और खासतौर पर एपीआई तथा अन्य जरूरी फार्मास्युटिकल कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता कम करना था। जून, 2026 तक इस योजना के तहत 5,210.74 करोड़ रुपए का निवेश किया जा चुका है, जो 4,330 करोड़ रुपए के निर्धारित निवेश से अधिक है। 28 एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) के विनिर्माण के लिए कुल 39 परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं।
निवेश और उत्पादन को प्रोत्साहित करना है उद्देश्य
फैक्टशीट के अनुसार, इस योजना से पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड और रिफैम्पिसिन जैसे महत्वपूर्ण फर्मेंटेशन-आधारित उत्पादों का घरेलू उत्पादन भी संभव हुआ है। पहले इनके लिए काफी हद तक आयात पर निर्भरता थी। फार्मास्युटिकल्स के लिए पीएलआई योजना को वर्ष, 2021 में मंजूरी दी गई थी, जिसके लिए कुल 15,000 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रावधान किया गया। इस योजना का उद्देश्य भारत की विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, निवेश और उत्पादन को प्रोत्साहित करना तथा उच्च-मूल्य वाली फार्मास्युटिकल उत्पादों की ओर बदलाव को बढ़ावा देना है।
योजना के तहत 55 आवेदकों का चयन
यह योजना बायोफार्मास्युटिकल्स, कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स, पेटेंटेड और पेटेंट-मुक्त दवाओं, ऑर्फन ड्रग्स, ऑटो-इम्यून दवाओं और अन्य उच्च-मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों के साथ-साथ बल्क ड्रग्स पीएलआई योजना के तहत शामिल नहीं किए गए चुनिंदा एपीआई और प्रमुख कच्चे माल के विनिर्माण को समर्थन देती है। इस योजना के तहत कुल 55 आवेदकों का चयन किया गया है, जिनमें 20 एमएसएमई शामिल हैं। जून, 2026 तक इस योजना के तहत 46,744 करोड़ रुपए का वास्तविक निवेश आकर्षित हुआ है, जो 17,275 करोड़ रुपए के लक्षित निवेश से काफी अधिक है।
विनिर्माण के लिए क्षमता का किया विस्तार
फैक्टशीट के अनुसार, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड, अरबिंदो फार्मा लिमिटेड, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड, ल्यूपिन लिमिटेड, सिप्ला लिमिटेड, इंटास फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड और टोरेंट फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड जैसी कंपनियों ने इस योजना के तहत कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स, बायोसिमिलर, ऑटो-इम्यून दवाओं और अन्य उच्च-मूल्य वाली फार्मास्युटिकल्स के विनिर्माण के लिए अपनी क्षमता का विस्तार किया है। मेडिकल डिवाइस के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना को 2020 में मंजूरी दी गई थी, जिसके लिए कुल 3,420 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रावधान किया गया। इस योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करना था।
पहल ने प्रमुख वैश्विक निर्माताओं को भी किया आकर्षित
यह योजना भारत में निर्मित पात्र मेडिकल डिवाइस की अतिरिक्तबिक्री पर पांच साल की अवधि के लिए 5 प्रतिशत प्रोत्साहन प्रदान करती है। इस योजना से पहले बड़े पैमाने पर आयात किए जाने वाले कई उच्च-स्तरीय मेडिकल डिवाइस के घरेलू विनिर्माण की क्षमता विकसित करने में मदद मिली है। योजना के तहत 57 अलग-अलग मेडिकल डिवाइस का उत्पादन शुरू हो चुका है। इनमें एमआरआई मशीन, सीटी स्कैनर, कैथ लैब, लीनियर एक्सेलरेटर, सी-आर्म, मैमोग्राफी मशीन, अल्ट्रासाउंड सिस्टम, एनेस्थीसिया मशीन और हार्ट वाल्व शामिल हैं। इस पहल ने प्रमुख वैश्विक निर्माताओं को भी आकर्षित किया है और भारत में तकनीक हस्तांतरण तथा उन्नत विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा दिया है।

