इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में तेज वृद्धि
भारत ने वर्ष 2030 तक 500 अरब डॉलर का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और 150 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा है। सरकारी Factsheet के मुताबिक, देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
एक्सपोर्ट में भी बड़ा इजाफा
इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट भी इस अवधि में करीब 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सरकार के मुताबिक, इस लगातार वृद्धि ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब फोकस घरेलू कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, ज्यादा Value Addition और Supply Chain Resilience को मजबूत करने पर है।
ECMS से बढ़ेगी घरेलू क्षमता
Electronics Component Manufacturing Scheme यानी ECMS को 8 अप्रैल 2025 को अधिसूचित किया गया था। इसे 22,919 करोड़ रुपये के शुरुआती आवंटन और छह साल की अवधि के साथ शुरू किया गया था। इसमें एक साल की अतिरिक्त Gestation Period का विकल्प भी रखा गया था।
आवंटन बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये
Union Budget 2026-27 में ECMS का कुल आवंटन बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। अगस्त 2026 तक 15 राज्यों में 106 Projects को मंजूरी मिल चुकी है। ये Projects 30 Electronic Domain Products से जुड़े हैं और इनमें 69,548 करोड़ रुपये के Approved Investment का प्रस्ताव है।
उत्पादन और रोजगार पर असर
मंजूर Projects में से 38 Plants में Production शुरू हो चुका है, जबकि 16 Projects Construction या Machinery Installation के Advanced Stage में हैं। इन Projects से 5.34 लाख करोड़ रुपये के Production और 74,628 Direct Jobs के साथ करीब 2.5 लाख Indirect Jobs पैदा होने का अनुमान है।
महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स में आत्मनिर्भरता
ECMS के जरिए Critical Electronics Components और Materials में घरेलू क्षमता मजबूत हो रही है। कई Product Categories में उत्पादन क्षमता अब घरेलू मांग के बराबर या उससे अधिक हो गई है। इससे Technology Resilience, Economic Security और National Self-Reliance को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

