Tuesday, September 15, 2026 |
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गेहूं की कीमतों में आया सबसे बड़ा उछाल

by Business Remedies
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तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचे दाम
 रूस-यूक्रेन युद्ध और सूखे ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
वैश्विकअनाज बाजार में गेहूं की कीमतों में हाल के दिनों में सबसे बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। अनाज बाजार के लिए ग्लोबल बेंचमार्कमाने जाने वाले शिकागो व्हीट फ्यूचर्स में भाव तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और कई प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में सूखे के असर से गेहूं की आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया भर में कीमतों में तेज इजाफा देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतों में लगभग 15 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि और पिछले महीनों में यह 3 से 3.5 साल के उच्चतम स्तर (लगभग 7.40 से 7.70 डॉलर प्रति बुशल या लगभग 277 डॉलर प्रति टन) के करीब पहुंच गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते ब्लैक सी क्षेत्र से गेहूं और अन्य अनाज के निर्यात में गंभीर बाधा आई है। पिछले एक महीने में दोनों देशों ने एक-दूसरे के अनाज टर्मिनलों पर हमले तेज कर दिए हैं। रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है, जबकि यूक्रेन अनाज पैदा करने वाले शीर्ष 10 देशों में शामिल है। इन हमलों का सीधा असर वैश्विक सप्लाई पर पड़ा है। अनाज टर्मिनलों पर लगातार हमलों ने सप्लाई चेन को बाधित किया है और निर्यात के पीक सीजन के दौरान जहाजों पर कार्गो लोडिंग में देरी हो रही है।
रूसी हमलें में यूक्रेन का अनाज निर्यात प्रभावित
रूसी मिसाइल हमलों ने यूक्रेन के अनाज निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। यूक्रेन के इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्रालय के अनुसार, जुलाई में यूक्रेन को बंदरगाह पर खड़े जहाजों पर 35, समुद्र में 22 और बंदरगाह सुविधाओं पर 67 रूसी हमलों का सामना करना पड़ा। यूक्रेन ने कहा कि हाल के रूसी हवाई हमलों ने रिटेलर्स की लगभग 90 प्रतिशत फूड लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को नष्ट कर दिया है। वहीं, अजोव सागर में यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस से होने वाले अनाज और गेहूं के शिपमेंट को काफी कम कर दिया है। रूस के नोवोरोसिस्क और तमन बंदरगाहों पर हुए हमलों से ब्लैक सी बंदरगाहों से शिपिंग की लागत भी बढ़ गई है।
अजोव सागर और ब्लैक सी बेसिन में बंदरगाह बंद
रूस के रोस्तोव क्षेत्र के अधिकारियों ने इमरजेंसी की घोषणा कर दी है। अजोव सागर और ब्लैक सी बेसिन में बंदरगाह बंद होने तथा नेविगेशन में रुकावट के कारण खेतों में अनाजों का ढेर लग गया है। इससे गेहूं के परिवहन में कमी आई है और कीमतें और बढ़ गई हैं।
युद्ध से जलवायु परिवर्तन का भी खतरा
युद्ध के अलावा जलवायु परिवर्तन का भी गहरा असर पड़ा है। कई देशों में सूखे और कम बारिश के कारण उत्पादन घटा है। बढ़ते तापमान और बारिश की कमी से दक्षिण अफ्रीका के स्वार्टलैंड क्षेत्र में इस साल गेहूं की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। अमरीका सहित अन्य प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में भी फसल पर दबाव बढ़ा है। इन दोनों कारकों—युद्धजनित आपूर्ति व्यवधान और मौसम संबंधी संकट, दोनों ने मिलकर गेहूं की वैश्विक कीमतों में तेज उछाल पैदा किया है।
दुनियाभर में खाद्य असुरक्षा का डर पैदा
इस स्थिति से दुनिया भर में खाद्य असुरक्षा का डर पैदा हो गया है। दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं आयातक देश मिस्र आमतौर पर गेहूं के आयात पर हर साल करीब 3 अरब डॉलर खर्च करता है। 2026 की पहली छमाही में उसने अपने स्टॉक का 82 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा रूस और यूक्रेन से मंगाया था। एशिया में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा आयातक इंडोनेशिया ने 2023 और 2024 के बीच यूक्रेन से 361 मिलियन डॉलर तथा रूस से 102 मिलियन डॉलर का गेहूं खरीदा था। इन देशों सहित कई अन्य आयातक देशों के लिए अब आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ब्लैक सी क्षेत्र में तनाव जारी रहने और मौसम संबंधी अनिश्चितताओं के बने रहने तक गेहूं की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है।



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