देश में राजधानी दिल्ली सहित राजस्थान में एक बार फिर मानसून सक्रिय हो गया है। देश के कई हिस्सों में तेज बारिश हो रही है। दिल्ली व जयपुर में कल और आज लगातार बारिश का दौर चला। वहीं दिल्ली में आज हुई मूसलाधार बारिश से कई इलाकों में जलजमाव हो गया। दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानें भी प्रभावित हुईं। तेज बारिश के चलते लोगों की आवाजाही भी थम गई। दूसरी ओर राजस्थान में राजधानी जयपुर सहित अजमेर में स्कूल की दीवार गिरने की घटना ने सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है। इन परिस्थितियों में सरकार ने पांच जिलों में स्कूलों में अवकाश की घोषणा कर सही कदम उठाया है। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया है, जो सराहनीय है।
तेज बारिश के साथ जलभराव, सडक़ों का कट जाना और पुरानी इमारतों के गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है। अजमेर जैसी घटनाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि मौसम की मार से निपटने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए स्कूलों में छुट्टी का फैसला न सिर्फ सही, बल्कि आवश्यक भी था। प्रशासन ने लोगों से ऐहतियात बरतने की अपील की है। अब जरूरत इस बात की है कि नागरिक भी इस अपील को गंभीरता से लें। जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें। अनावश्यक आवागमन से बचें। खुले में खड़े पेड़ों या कमजोर दीवारों के पास न जाएं। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें क्योंकि सडक़ें फिसलन भरी हो जाती हैं। बिजली के खंभों और तारों से दूरी बनाए रखें। घरों में पानी घुसने की स्थिति में तुरंत संबंधित विभाग से संपर्क करें।
सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ अवकाश घोषित करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना, पुरानी इमारतों की जांच करवाना और आपातकालीन राहत टीमों को सक्रिय रखना जरूरी है। साथ ही, मौसम विभाग की चेतावनियों को समय पर लोगों तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है। बारिश जीवनदायी है, लेकिन उसकी तेज मार विनाशकारी भी साबित हो सकती है। राजस्थान जैसे राज्य में जहां जल संकट और बाढ़ दोनों की समस्याएं बनी रहती हैं, वहां सामूहिक सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। सरकार, प्रशासन और नागरिक तीनों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा। सावधानी बरतें, सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सचेत करें। प्रकृति के इस प्रकोप से निपटने का यही सबसे अच्छा तरीका है।

