Sunday, September 6, 2026 |
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चीनी के दाम घटे, राहत मिलने में लगेगा वक्त

by Business Remedies
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— चीनी एक हफ्ते में 4 प्रतिशत सस्ती
— फिर भी बीते माह से 27 प्रतिशत महंगी

नई दिल्ली। देशभर में चीनी के खुदरा (रिटेल) भावों में पिछले एक हफ्ते के दौरान आंशिक गिरावट दर्ज की गई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, एक हफ्ते पहले जो चीनी 65.08 रुपए प्रति किलो बिक रही थी, वह करीब 3.85 प्रतिशत घटकर 62.57 रुपए प्रति किलो पर आ गई है। इसके बावजूद, कीमतें पिछले महीने के 49.33 रुपए प्रति किलो के औसत स्तर से अब भी लगभग 27 प्रतिशत ऊपर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को पूरी राहत मिलने में अभी वक्त लग रहा है।

कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कई उपाय किए थे। इनमें 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति देना शामिल है। इसके अलावा बल्क यूजर्स और डीलरों के लिए स्टॉक रखने से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया। सरकार की कोशिश एक साथ सप्लाई बढ़ाने और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर नजर रखने की है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इन कदमों के बाद थोक और रिटेल दोनों बाजारों में कीमतों में कुछ नरमी आई है।

थोक बाजारों में नरमी और सरकारी कदम
थोक बाजार में भी कीमतों में नरमी का रुख देखा गया है। 2 सितंबर को चीनी का औसत थोक भाव 57.62 रुपए प्रति किलो दर्ज किया गया, जो एक हफ्ते पहले 60.39 रुपए प्रति किलो था। थोक स्तर पर आई इस 2.77 रुपए प्रति किलो की कमी के पीछे केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए सख्त कदम हैं। कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने हाल ही में 10 लाख टन चीनी के आयात (इंपोर्ट) की अनुमति दी है और साथ ही थोक उपभोक्ताओं व डीलरों के लिए स्टॉक सीमा के नियमों को भी कड़ा किया है।

रिटेल बाजार में क्यों नहीं दिख रहा पूरा असर?
थोक भाव गिरने के बावजूद ग्राहकों को इसका तुरंत पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि अधिकांश खुदरा दुकानदारों के पास पहले से ही महंगे दामों पर खरीदा हुआ पुराना स्टॉक मौजूद है। दुकानदार उस पुराने स्टॉक को नुकसान उठाकर कम कीमत पर बेचने से बच रहे हैं। माना जा रहा है कि जैसे ही यह पुराना स्टॉक खत्म होगा और नया सस्ता माल दुकानों तक पहुंचेगा, तब ग्राहकों को खुदरा बाजार में पूरी राहत मिल सकेगी।

उत्पादन में कमी और खपत की स्थिति
सरकार ने मिलों पर कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाने का आरोप लगाया है, जबकि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि 2025-26 के मार्केटिंग ईयर के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है, फिर भी देश की सालाना घरेलू मांग (करीब 280-285 लाख टन) को देखते हुए उपलब्धता का कोई बड़ा संकट नहीं है। आगामी 10 दिन बाजार के लिहाज से बेहद अहम बताए जा रहे हैं, क्योंकि सरकार सप्लाई बढ़ाने और स्टॉक पर कड़ी नजर बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।



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