CAS को लेकर SEBI का बड़ा बयान
Mumbai, 7 अगस्त। नए Closing Auction Session (CAS) के लागू होने के बाद शेयरों और benchmark indices के Closing Price में दिखे अंतर को लेकर उठे सवालों के बीच Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने इस व्यवस्था का बचाव किया है। SEBI के मुताबिक यह बदलाव cross-market consistency हासिल करने और भारत के price discovery mechanism को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
3 अगस्त से लागू हुआ नया सिस्टम
SEBI ने अपनी Annual Report 2025-26 में कहा कि equity cash segment में Closing Price तय करने की प्रक्रिया को global standards के अनुरूप बनाने के लिए 20 मिनट का dedicated CAS शुरू किया गया है। इसे 3 अगस्त 2026 से phased manner में लागू किया गया। शुरुआती चरण में CAS उन stocks पर लागू है, जिन पर derivative contracts उपलब्ध हैं।
Passive Investing ने बढ़ाई जरूरत
भारतीय capital market में passive investing तेजी से बढ़ी है। 31 मार्च 2026 तक passive funds की हिस्सेदारी FPI equity AUM में करीब 30 प्रतिशत और domestic mutual fund equity AUM में 28 प्रतिशत रही। वहीं MSCI और FTSE जैसे global indices में भारतीय stocks का बढ़ता weight सटीक Closing Price की अहमियत बढ़ा रहा है।
VWAP से कैसे अलग है CAS
पुरानी VWAP व्यवस्था में अंतिम 30 मिनट के trades के औसत से Closing Price तय होता था। इसके विपरीत CAS सभी buy और sell orders को एक transparent auction में एक साथ लाकर supply और demand के अधिकतम matching के आधार पर equilibrium price तय करता है। SEBI का मानना है कि इससे volatility और price disruption कम हो सकती है।
Investors के बीच बहस जारी
नई व्यवस्था के शुरुआती trading sessions में benchmark और कुछ stocks के official Closing Price में तेज अंतर देखने के बाद market participants के बीच बहस तेज हुई है। Investors अब CAS की कार्यप्रणाली और end-of-day price discovery की reliability पर नजर बनाए हुए हैं।

