Friday, July 31, 2026 |
Home Automobileभारत की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री के वित्त वर्ष 30 तक 10 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान: रिपोर्ट

भारत की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री के वित्त वर्ष 30 तक 10 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान: रिपोर्ट

by Business Remedies
0 comments

भारत की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री के वित्त वर्ष 30 तक 10 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान: रिपोर्ट
नई दिल्ली | बिजनेस रेमेडीज
भारत की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के वित्त वर्ष 2030 तक लगभग 10 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढऩे की उम्मीद है। इसकी वजह मैन्युफैक्चरर्स द्वारा सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट, डिफेंस, एयरोस्पेस और डेटा-सेंटर पावर जेनरेशन जैसे अधिक मार्जिन वाले प्रिसिजन इंजीनियरिंग सेक्टर में अपने कारोबार का विस्तार करना है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
यूएस इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैश की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि देश की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री की आय वित्त वर्ष 30 तक 124.4 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है, जो कि वित्त वर्ष 26 में 85.6 अरब डॉलर थी। इस दौरान एबिटडा सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान है। इसकी वजह कंपनियों का ज्यादा मार्जिन वाले कारोबार में विस्तार करना है। इन्वेस्टमेंट बैंक ने कहा कि जैसे-जैसे भारत का ऑटो सेक्टर “बदलाव के दौर” में प्रवेश कर रहा है, कई मैन्युफैक्चरर्स अपने प्रोडक्ट मिक्स को बदल रहे हैं और मुनाफा बढ़ाने के लिए अपनी मौजूदा क्षमताओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सप्लाई चेन के जोखिम को कम करने की वैश्विक कोशिशों के कारण सेमीकंडक्टर, ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल खरीदार भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे भारतीय प्रिसिजन-मशीनिंग कंपनियों के लिए सेमीकंडक्टर वेफर-फैब्रिकेशन इक्विपमेंट, इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपोनेंट्स, एयरोस्पेस, डिफेंस और डेटा सेंटर पावर जेनरेशन जैसे क्षेत्रों में अवसर पैदा हो रहे हैं। ब्रोकरेज ने कहा कि इन कंपनियों के बारे में मौजूदा धारणा (ये मुख्य रूप से सीमित प्राइसिंग पावर और बार-बार होने वाले पूंजीगत खर्च की जरूरतों वाली साइक्लिकल ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स हैं) इनके बढ़ते हुए मार्केट को पूरी तरह से नहीं दर्शाती है। वित्त वर्ष 26- वित्त वर्ष 30 के दौरान ग्रोथ मुख्य रूप से इलेक्ट्रिफिकेशन, आने वाले आठवें वेतन आयोग, एक्सपोर्ट, पुराने इंटरनल कंबशन इंजन (आईसीई) कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के भारत में शिफ्ट होने और डिफेंस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में विस्तार से आएगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को कम लेबर कॉस्ट, पुराने आईसीई प्रोडक्ट्स में प्रतिस्पर्धात्मकता और घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रिफिकेशन की अपेक्षाकृत धीमी गति से फायदा मिलने की उम्मीद है।
ब्रोकरेज ने अनुमान लगाया है कि अगले वेतन आयोग से प्रेरित डिमांड साइकिल के दौरान ऑटो कंपोनेंट कंपनियां वाहन बनाने वाली कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन करेंगी। इसमें कहा गया, “सप्लायर्स को किसी एक वाहन मॉडल की सफलता पर निर्भर रहने के बजाय कई ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) के लिए ज्यादा प्रोडक्शन वॉल्यूम से फायदा होता है।”



You may also like

Leave a Comment