भारत का औद्योगिक विकास पिछले पांच वर्षों में काफी बढ़ा है। इससे लगता है कि देश धीरे-धीरे विकासशील से विकसित देशों की श्रेणी की ओर बढऩे का प्रयास कर रहा है। भारत ने औद्योगिक विकास के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रगति की है। मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में भारत दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल हो गया है। वहीं मोबाइल फोन निर्यात में भी कई गुना वृद्धि हुई है और भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। स्टील, सीमेंट, कोयला और ऑटोमोबाइल उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पीएलआई जैसी योजनाओं ने इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा, सौर उपकरण, ऑटो पार्ट्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया है। हाल के वर्षों में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि भी मजबूत रही है, जिसमें विनिर्माण सबसे बड़ा योगदान दे रहा है। इस वर्ष जून माह में ही आईआईपी का सूचकांक सालाना आधार पर ७.३ प्रतिशत की दर से बढ़ा है। इसमें इलेक्ट्रिसिटी और गैस आपूर्ति सेक्टर में १०.६ फीसदी व मैन्युफैक्चरिंग में ७.८ फीसदी की मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है। जहां भारत का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष, 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है। इसके लिए विनिर्माण का जीडीपी में योगदान लगभग 25 फीसदी तक ले जाना, वैश्विक सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनना, उच्च तकनीक वाले उद्योग सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस, ग्रीन एनर्जी को बढ़ाना, रोजगार और निर्यात दोनों में वृद्धि करना रहेगा। यदि हम विनिर्माण की बात करें, तो भारत आज दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा विनिर्माण देश बन गया है। भारत की वैश्विक विनिर्माण हिस्सेदारी करीब 3 फीसदी है। भारत से आगे चीन, अमेरिका, जापान, जर्मनी है। आने वाले वर्षों में भारत का लक्ष्य अधिक उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण, बड़े पैमाने पर निर्यात, निवेश और रोजगार बढ़ाकर दुनिया के शीर्ष औद्योगिक देशों में और ऊपर पहुंचना रहेगा।

