Friday, July 3, 2026 |
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आगामी वर्ष में परिचालन दक्षता बनी 78 प्रतिशत MSME की सबसे बड़ी प्राथमिकता: रिपोर्ट

by Business Remedies
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Indian MSMEs Prioritising Operational Efficiency And Digital Transformation For Future Growth

नई दिल्ली,

देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) अब केवल आय बढ़ाने या नए ग्राहकों को जोड़ने पर ही ध्यान नहीं दे रहे हैं, बल्कि परिचालन दक्षता को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बना रहे हैं। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 78 प्रतिशत एमएसएमई ने आगामी वर्ष के लिए परिचालन दक्षता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के एमएसएमई विकास की नई रणनीति अपना रहे हैं। सर्वेक्षण में 71 प्रतिशत उद्यमों ने आय वृद्धि को प्राथमिकता दी, जबकि 64 प्रतिशत ने नए ग्राहकों को जोड़ने को महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एमएसएमई अब उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और परिचालन स्तर पर मजबूती विकसित करने की दिशा में रणनीतिक बदलाव कर रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि कारोबारी संस्थान दीर्घकालिक स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत बनाने पर जोर दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 58 प्रतिशत एमएसएमई डिजिटल परिवर्तन को अपनाने पर ध्यान दे रहे हैं, जबकि 57 प्रतिशत लागत अनुकूलन को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि कारोबारी संस्थान बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए तकनीक का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहते हैं।

आने वाले समय में परिवर्तन की अगली अवस्था को ध्यान में रखते हुए 55 प्रतिशत एमएसएमई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, 52 प्रतिशत उद्यम साइबर सुरक्षा संबंधी तैयारियों को मजबूत बनाने में जुटे हैं। इससे नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलित दृष्टिकोण देखने को मिलता है। साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) के उद्योग अनुसंधान समूह (आईआरजी) के उपाध्यक्ष प्रभु राम ने कहा कि आय वृद्धि और ग्राहक विस्तार अभी भी महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं, लेकिन अब एमएसएमई उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और अनिश्चित कारोबारी माहौल में दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित करने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मूल्यांकन आधारित संरचित रणनीतियां एमएसएमई को उनकी कारोबारी आवश्यकताओं और कमियों की पहचान करने में मदद कर रही हैं। इसके माध्यम से वे कनेक्टिविटी, क्लाउड सेवाओं, साइबर सुरक्षा और डिजिटल उपकरणों जैसे उपयुक्त समाधान चुनकर अपनी कारोबारी योजनाओं को वास्तविक परिणामों में बदल पा रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि डिजिटल परिवर्तन के महत्व को समझने के बावजूद उसे व्यवहारिक रूप से लागू करना अभी भी कई उद्यमों के लिए चुनौती बना हुआ है। सीमित बजट, कौशल की कमी, साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएं और सही तकनीकी विकल्पों को लेकर अनिश्चितता अपनाने की गति को धीमा कर रही हैं।

करीब 26 प्रतिशत एमएसएमई ने स्वीकार किया कि उनके पास आंतरिक डिजिटल विशेषज्ञता की कमी है। वहीं, 20 प्रतिशत उद्यमों को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप सही तकनीकी समाधान चुनने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लगभग 6 प्रतिशत एमएसएमई को विश्वसनीय सलाहकारी सहायता नहीं मिल पा रही है। इससे स्पष्ट होता है कि तेजी से जटिल होते तकनीकी परिदृश्य में सही मार्गदर्शन की कमी भी उद्यमों के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।



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