Sunday, June 28, 2026 |
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से सोना-चांदी में गिरावट, वैश्विक तनाव कम होने का भी असर

by Business Remedies
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Gold And Silver Prices Decline After Fed Reserve Signals Further Rate Hikes

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को यथावत रखने और भविष्य में अतिरिक्त दर वृद्धि के संकेत देने के बाद गुरुवार को सोना और चांदी की कीमतों में दबाव देखने को मिला। इसके साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में नरमी आने से सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की मांग भी कमजोर हुई, जिससे दोनों धातुओं में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना वायदा कारोबार के दौरान 1.37 प्रतिशत या ₹.2,111 की गिरावट के साथ ₹.1,51,768 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। सुबह लगभग 11:36 बजे सोना ₹.1,51,797 पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव की तुलना में 1.35 प्रतिशत या ₹.2,082 कम था।

कारोबार के दौरान सोना ₹.1,52,831 के उच्च स्तर तक भी पहुंचा, लेकिन यह भी पिछले बंद भाव ₹.1,53,879 की तुलना में ₹.1,048 नीचे रहा। इससे स्पष्ट है कि पूरे सत्र के दौरान निवेशकों की धारणा कमजोर बनी रही। वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चांदी वायदा कीमत ₹.2,44,945 पर कारोबार कर रही थी, जो पिछले बंद भाव ₹.2,51,807 से ₹.6,862 या 2.73 प्रतिशत कम थी। सत्र के दौरान चांदी ₹.2,44,647 के निचले स्तर तक फिसल गई, जहां इसमें लगभग 3प्रतिशत या ₹.7,160 की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दिन के दौरान इसने ₹.2,48,000 का उच्च स्तर भी छुआ।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती ने सोना तथा चांदी जैसे कीमती धातुओं के आकर्षण को कम किया है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं में खरीदारी महंगी हो जाती है, जिससे मांग प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने भले ही इस बार ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया, लेकिन मुद्रास्फीति को लक्ष्य स्तर तक लाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए आगे और दर वृद्धि की संभावना जताई है। इसी कारण निवेशकों ने कीमती धातुओं में नई खरीदारी से दूरी बनाई।

इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते के बाद भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई है। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, लेकिन तनाव कम होने से सोने और चांदी की मांग पर नकारात्मक असर पड़ा। हालांकि चांदी में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही। विश्लेषकों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अवसंरचना, डाटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में बढ़ते निवेश के कारण चांदी की औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है। विशेष रूप से चीन में इन क्षेत्रों में बढ़ता निवेश चांदी की मांग को सहारा दे रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी का माहौल रहा। कॉमेक्स चांदी लगभग 3प्रतिशत की गिरावट के साथ 68.76 डॉलर पर कारोबार कर रही थी, जबकि कॉमेक्स सोना 1 प्रतिशत से अधिक टूटकर 4,318.90 डॉलर पर पहुंच गया। ऊर्जा बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चा तेल 1.64 प्रतिशत गिरकर लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल करीब 2प्रतिशत की गिरावट के साथ 75डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।



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