Friday, August 14, 2026 |
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भारत के लिए व्यापारिक साझेदारियों के नए अवसर, अगले छह महीनों में 3 और FTA हो सकते हैं लागू : पीयूष गोयल

by Business Remedies
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Piyush Goyal speaking about India trade agreements and economic growth at City India Conference 2026

मुंबई | 

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत के दरवाजे वैश्विक व्यापारिक साझेदारियों के लिए पूरी तरह खुले हैं और 1 जून से ओमान के साथ Free Trade Agreement (एफटीए) लागू होने के बाद अगले छह महीनों में दो से तीन और व्यापार समझौते प्रभावी हो सकते हैं। मुंबई में आयोजित City India Conference 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आगामी एक वर्ष के दौरान तीन से चार प्रमुख एफटीए पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। साथ ही अगले 9 से 10 महीनों में पाइपलाइन में मौजूद सभी नौ एफटीए के लागू होने की उम्मीद है। उनका कहना था कि इससे भारतीय निर्यातकों को नए बाजार मिलेंगे, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और देश की आर्थिक गतिविधियों में और तेजी आएगी।

मंत्री ने हाल के पश्चिम एशियाई संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास उत्पन्न जोखिमों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने देश में ईंधन आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद महंगाई को नियंत्रित रखने में सफलता मिली है। भारत ने पहले से ही अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई थी, जिसके कारण किसी भी संभावित आपूर्ति बाधा का प्रभाव सीमित रहा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोल, डीजल, विमानन टरबाइन ईंधन, कारखानों के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस तथा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। इसके चलते उद्योगों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ा।

पीयूष गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति और ऊर्जा संबंधी जोखिम बढ़ने के बावजूद देश में ईंधन कीमतों पर दबाव को सीमित रखा गया है। इसके अलावा किसानों को उर्वरक पहले की कीमतों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में हुई बढ़ोतरी का बोझ किसानों पर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि आज भारत को विनिर्माण और निवेश के लिए दुनिया के सबसे विश्वसनीय विकल्पों में से एक माना जा रहा है। वैश्विक कंपनियां भारत को दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में देख रही हैं, जिससे रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को नई गति मिल रही है।

मंत्री के अनुसार भारत अगले दो दशकों तक दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा। उन्होंने कहा कि देश अब केवल असेंबली आधारित उत्पादन या आयातित प्रौद्योगिकियों पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, नई प्रौद्योगिकियों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोगों पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही डेटा केंद्रों और अन्य उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए स्वच्छ ऊर्जा को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। उनका मानना है कि यह रणनीति भारत को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



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