भारत का पिछले दो माह से निरंतर व्यापारिक समझौते को लेकर मशक्कत चल रही है। कई देशों से एफटीए के तहत समझौते भी हुए, सफलता भी मिली है। अब पिछले दिनों ही अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल से नई दिल्ली में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। संभवत: एक या दो दिन में अमेरिका के बीटीए धरातल पर आ जाएंगे। अमेरिका के साथ बातचीत में मुख्य रूप से टैरिफ कम करने, डिजिटल व्यापार नियमों, बाजार पहुंच, निवेश को बढ़ावा देने और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। दोनों देश अंतिम तकनीकी और कानूनी पहलुओं को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि भारतीय बाजार उसके कृषि उत्पादों, पशु-चारा, फलों और डेयरी उत्पादों के लिए अधिक खुले। वहीं भारत अपने किसानों और डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। डेयरी, आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें और कुछ कृषि उत्पाद लंबे समय से विवाद के विषय रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका भारतीय बाजार में अपने औद्योगिक उत्पादों के लिए कम शुल्क चाहता है। भारत बदले में अमेरिका से वस्त्र, चमड़ा, रत्न-जवाहरात, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग उत्पादों पर बेहतर पहुंच चाहता है। भारत डेटा संप्रभुता बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिकी टेक कंपनियां अधिक खुलापन चाहती हैं। दोनों देश चीन पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाओं पर सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। बातचीत का करीब 99 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है और अब केवल कुछ मुद्दों पर सहमति बनना शेष है। जल्द ही अमेरिका के साथ पहले द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की घोषणा हो सकती है। इसके बाद दूसरे चरण की बातचीत शुरू हो पाएगी। बातचीत में अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत लगाए गए शुल्क भी शामिल हो सकते हैं। भारत इन मामलों में राहत चाहता है और व्यापार से जुड़े विवाद भी एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे। यदि यह व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर और प्राथमिकता वाली पहुंच मिल सकती है। यदि समझौता भारत की मौजूदा रूपरेखा के अनुसार होता है और कृषि-डेयरी क्षेत्र को पर्याप्त सुरक्षा मिल सकती है। इसका शुद्ध आर्थिक प्रभाव सकारात्मक रहने की संभावना है।

