मुंबई, 2 जून। पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के बीच नकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते सप्ताह के दूसरे कारोारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। इस दौरान, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में व्यवधान के संकेतों और कमजोर मानसून की आशंकाओं के कारण घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क BSE Sensex 322 अंकों यानी 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,945.20 पर खुला। तो वहीं, NSE Nifty50 153.45 अंक यानी 0.65 प्रतिशत टूटकर 23,229.15 पर खुला।खबर लिखे जाने तक (सुबह 9:18 बजे के करीब) Nifty50 134.30 अंक या 0.57 प्रतिशत गिरकर 23,259.70 पर था, तो वहीं Sensex 437.97 अंक या 0.59 प्रतिशत गिरकर 73,829.37 पर कारोबार कर रहा था। व्यापक बाजार में, Nifty Midcap और Nifty Smallcap सूचकांक क्रमशः 0.95 प्रतिशत और 0.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
वहीं, सेक्टरवार देखें तो शुरुआती कारोबार में अधिकांश Sectoral Index लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए। Nifty Auto, Nifty Realty और Nifty Chemicals में करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा Private Bank, PSU Bank, Cement और Media सेक्टर के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि, IT सेक्टर ने बाजार को कुछ राहत दी। Nifty IT Index करीब 2 प्रतिशत की मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा, जिससे Technology शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रही। Nifty Metal ने भी बेहतर प्रदर्शन किया।
Nifty50 Index में Bajaj Finance, Bajaj Finserv, Max Healthcare, Eternal, HDFC Life, Power Grid और Shriram Finance के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। जबकि Infosys, TCS, Tech Mahindra, HCLTech और Hindalco के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। वहीं, बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX Index 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर 16 के स्तर पर आ गया, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।कमोडिटी बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 0.67 प्रतिशत गिरकर 94.34 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं, अमेरिकी West Texas Intermediate (WTI) Crude 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 91.46 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया।मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर मानसून की आशंकाएं निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर रही हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा अनुमान के अनुसार इस वर्ष मानसून सामान्य से केवल 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो इसका असर कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग और महंगाई पर पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट का समाधान और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से निवेशकों की चिंता बनी हुई है।एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा अस्थिर माहौल में निवेशकों को घबराने की बजाय मजबूत बुनियादी कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही अपने जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार निवेश रणनीति बनाए रखना जरूरी है।मौसम विभाग ने इस बार पिछले 11 वर्षों का सबसे कमजोर मानसून रहने की संभावना जताई है। इससे कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यही वजह है कि कृषि और ग्रामीण मांग से जुड़े शेयरों पर भी दबाव देखने को मिल रहा है।

