भारत और ओमान के बीच लागू हुए नए FTA समझौते के बाद आने वाले 3 वर्षों में भारत के वस्तु निर्यात में लगभग 50प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई गई है। यह समझौता सोमवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। भारत सरकार का लक्ष्य मौजूदा लगभग $4.06 बिलियन के निर्यात को बढ़ाकर $6बिलियन से अधिक तक पहुंचाना है, जबकि मध्यम अवधि में इसे $10 बिलियन तक ले जाने की योजना बनाई गई है। ओमान ने अपने 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क पहुंच की सुविधा दी है, जिससे भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को सीधा लाभ मिलेगा। इस समझौते से रत्न एवं आभूषण, कपड़ा, चमड़ा, जूते, खेल सामग्री, प्लास्टिक उत्पाद, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, औषधि, चिकित्सा उपकरण और वाहन जैसे श्रम आधारित क्षेत्रों को पूरी तरह शुल्क समाप्ति का लाभ मिलेगा।
भारत की ओर से भी कुल 77.79प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क उदारीकरण की पेशकश की गई है, जिससे मूल्य के आधार पर ओमान से होने वाले 94.81प्रतिशत आयात को लाभ मिलेगा। हालांकि भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए कई उत्पादों को छूट श्रेणी से बाहर रखा है। इनमें डेयरी उत्पाद, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, सोना, चांदी, आभूषण, जूते, खेल सामग्री और कई धातुओं का कबाड़ शामिल हैं। वित्त मंत्रालय ने रविवार को ओमानी उत्पादों पर शुल्क रियायत से जुड़ी अधिसूचना जारी की थी, जो 1June से प्रभावी हो गई। भारत और ओमान के बीच यह CEPA समझौता पिछले वर्ष दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था।
सेवा क्षेत्र में भी इस समझौते से भारत को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। ओमान का वैश्विक सेवा आयात लगभग $12.52 बिलियन का है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 5.31 प्रतिशत है। इससे भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए बड़े अवसर खुलने की संभावना बन रही है। समझौते के तहत कंप्यूटर संबंधित सेवाएं, व्यापारिक एवं पेशेवर सेवाएं, ऑडियो-विजुअल सेवाएं, अनुसंधान एवं विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में ओमान ने महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं दी हैं। इससे भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को नए बाजारों तक पहुंच आसान होगी और उच्च मूल्य वाली नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे।
CEPA की सबसे बड़ी विशेषताओं में भारतीय पेशेवरों के लिए बेहतर आवाजाही व्यवस्था शामिल है। ओमान ने पहली बार भारतीय पेशेवरों के लिए व्यापक प्रतिबद्धताएं दी हैं। इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरी कोटा को 20प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है। वहीं कॉन्ट्रैक्ट सर्विस सप्लायर्स के रहने की अवधि को मौजूदा 90 दिन से बढ़ाकर 2वर्ष कर दिया गया है, जिसे आगे और 2 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।
इसके अलावा अकाउंटेंसी, टैक्सेशन, आर्किटेक्चर, चिकित्सा और संबंधित सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों के लिए प्रवेश और रहने की शर्तों को भी अधिक उदार बनाया गया है। इससे दोनों देशों के बीच पेशेवर सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत हाल के वर्षों में वैश्विक व्यापार विस्तार पर तेजी से काम कर रहा है। इससे पहले भारत जुलाई 2025 में यूनाइटेड किंगडम और अप्रैल 2026 में न्यूज़ीलैंड के साथ भी व्यापार समझौते कर चुका है। वहीं यूरोपीय संघ के साथ भी FTA वार्ता पूरी हो चुकी है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अमेरिकी टैरिफ विवादों के बीच भारत अपने व्यापारिक साझेदारों का दायरा तेजी से बढ़ा रहा है।

