नई दिल्ली: केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है। जिन पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जा रहा है या कम मात्रा में दिया जा रहा है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। सरकार लगातार देशभर के पेट्रोल पंपों से फीडबैक प्राप्त कर रही है और सभी रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन की पूरी आपूर्ति बनाए रखी गई है। अधिकारियों के अनुसार, रूस से आने वाले कच्चे तेल के आयात में भी किसी प्रकार की कमी नहीं की गई है, ताकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की रिफाइनरियों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल मिलता रहे। सरकार ने यह भी कहा कि कुछ क्षेत्रों में डीजल की मांग बढ़ी है, क्योंकि इस समय फसल कटाई का मौसम चल रहा है। इसके चलते कई पेट्रोल पंपों पर बिक्री में बढ़ोतरी देखी गई है।
इसके अलावा, निजी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा कीमतें बढ़ाने के बाद कई उपभोक्ताओं ने सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल कंपनियों के पेट्रोल पंपों की ओर रुख किया है। इसी कारण सरकारी पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि संस्थागत और व्यावसायिक बिक्री, जिनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुसार लगभग ₹.20 अधिक होती हैं, उनका दबाव भी अब पेट्रोल पंपों पर बढ़ा है। इससे कुछ स्थानों पर मांग सामान्य से अधिक हो गई है। सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹.3.91 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। अधिकारियों के अनुसार यह बढ़ोतरी केवल 4.4 प्रतिशत बैठती है, जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। खासकर उन देशों की तुलना में जहां सरकारें सीधे सब्सिडी नहीं देतीं, वहां ईंधन कीमतों में कहीं अधिक वृद्धि हुई है।
इंडियन ऑयल के एक अधिकारी ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल कंपनियों ने लगातार 76 दिनों तक कच्चे तेल की बढ़ती लागत का भार स्वयं उठाया था। इसके बाद केवल आंशिक लागत वसूली के लिए ₹.3.91 की वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 10 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें तीन महीने पहले की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत अधिक हो चुकी हैं। वहीं मलेशिया में करीब 56 प्रतिशत और संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 52 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ी हैं।
अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में करीब 45 प्रतिशत और डीजल में लगभग 48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं यूनाइटेड किंगडम में पेट्रोल लगभग 19 प्रतिशत और डीजल करीब 34 प्रतिशत महंगा हुआ है। जर्मनी में पेट्रोल लगभग 14 प्रतिशत और डीजल करीब 20 प्रतिशत महंगा हुआ है। फ्रांस में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 21 प्रतिशत और डीजल में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि 20 प्रतिशत से कम रखी गई है, लेकिन डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। सिंगापुर में डीजल की कीमतों में लगभग 65 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया है।

