अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ संभावित समझौते के संकेत दिए जाने के बाद बुधवार को वैश्विक कच्चे तेल कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 1प्रतिशत तक कमजोर हुईं, जिससे ऊर्जा बाजार में राहत की उम्मीद बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चा तेल वायदा कीमत में 0.9प्रतिशत यानी लगभग $1 की गिरावट आई और यह $110.28 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI कच्चा तेल वायदा भी करीब 1प्रतिशत यानी $1.03 टूटकर $103.12 प्रति बैरल पर आ गया।
इससे पहले मंगलवार को भी वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत में प्रगति के संकेत मिलने के बाद दोनों प्रमुख मानकों में लगभग $1 की गिरावट देखी गई थी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम के बीच निकट अवधि में कच्चे तेल कीमतों का रुझान सतर्क तेजी वाला बना रह सकता है। हालांकि, शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता और क्षेत्र से तेल आपूर्ति में लगातार बाधा के कारण निवेशकों में सावधानी का माहौल बना हुआ है। निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका और ईरान किसी स्थायी शांति समझौते तक पहुंच पाते हैं या नहीं।
वार्षिक कांग्रेसनल पिकनिक कार्यक्रम में बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष “बहुत जल्दी” समाप्त हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि तेहरान समझौता करने के लिए बेहद इच्छुक है। ट्रंप ने यह भी कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति काफी अधिक है, जिसके कारण आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। उनके अनुसार बाजार में उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि “बाजार में बहुत अधिक तेल मौजूद है और कीमतों में तेज गिरावट आएगी।” साथ ही उन्होंने दोहराया कि ईरान जल्द समझौता करना चाहता है। इस बीच वैश्विक ब्रोकरेज कंपनी Citigroup ने अनुमान जताया है कि निकट अवधि में ब्रेंट कच्चा तेल कीमत $120 प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं Morgan Stanley ने तेल बाजार को “समय के खिलाफ दौड़” बताया है। कंपनी के अनुसार यदि होर्मुज जलडमरूमध्य जून तक बंद रहता है, तो अभी कीमतों को सीमित रखने वाले कारक कमजोर पड़ सकते हैं। ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि अमेरिका से बढ़ता कच्चे तेल निर्यात और चीन की नरम आयात मांग ने फिलहाल बाजार को बड़े आपूर्ति संकट से बचाने में मदद की है।

