बुधवार को घरेलू शेयर बाज़ार में तेज गिरावट देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों में दबाव बना रहा। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty दोनों में भारी बिकवाली दर्ज की गई। वहीं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर बना रहा। सुबह 9:30 बजे BSE का Sensex 460.06 अंक यानी 0.61 प्रतिशत गिरकर 74,740.79 पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं NSE का Nifty 140.55 अंक यानी 0.60 प्रतिशत टूटकर 23,477.45 पर पहुंच गया। बाज़ार में गिरावट का असर व्यापक रूप से देखने को मिला और अधिकतर क्षेत्रों में बिकवाली हावी रही।
शेयर बाज़ार में गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़त वाले शेयरों से काफी अधिक रही। करीब 1,737 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 1,088 शेयरों में बढ़त देखने को मिली। इससे साफ संकेत मिला कि पूरे बाज़ार में कमजोरी बनी हुई है। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो रियल्टी, मीडिया, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। दूसरी तरफ सूचना प्रौद्योगिकी और दवा क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में अपेाकृत मजबूती दिखाई दी, जिससे इन क्षेत्रों ने बाज़ार को कुछ सहारा देने की कोशिश की।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी बनी रही। व्यापक बाज़ार में निवेशकों की सतर्कता बढ़ती दिखाई दी। India VIX में 3प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जो बाज़ार में बढ़ती अस्थिरता और निवेशकों की चिंता का संकेत माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण आने वाले कारोबारी सत्रों में भी शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते दिखाई दे रहे हैं।




