हर वर्ष भारत में अस्थमा के रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, इसके निदान और जागरूकता के लिए प्रति वर्ष आज के दिन विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। यह दिन अस्थमा के लक्षण, प्रबंधन और उपचार के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए मनाया जाता रहा है। इसका उद्देश्य अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, निदान में सुधार करना और प्रभावी उपचार तक पहुंच सुनिश्चित करना है, विशेष रूप से बढ़ते प्रदूषण और श्वसन संबंधी समस्याओं के बीच। यह अस्थमा के बारे में भ्रांतियों को दूर करने, फेफड़ों के स्वास्थ्य के बारे में लोगों को शिक्षित करने और सूजनरोधी इनहेलर की सुलभता सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण दिन है। अस्थमा एक दीर्घकालिक बीमारी है, जो श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। इससे खांसी, घरघराहट, सीने में जकडऩ और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। समय पर निदान, सही इनहेलर का उपयोग, ट्रिगर्स पर नियंत्रण और नियमित फॉलो-अप से अस्थमा से पीडि़त अधिकांश लोग सक्रिय और संतुष्टिपूर्ण जीवन जी सकते हैं। इस वर्ष इसका विषय अस्थमा से पीडि़त सभी लोगों के लिए सूजनरोधी इनहेलर की उपलब्धता, अभी भी एक अत्यावश्यक आवश्यकता है। यह विषय एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण संदेश को उजागर करता है। अस्थमा अक्सर श्वसन नलिकाओं में सूजन के कारण होता है। राहत देने वाली दवाएं लक्षणों को तुरंत कम कर सकती हैं, लेकिन सूजन-रोधी इनहेलर अंतर्निहित सूजन को नियंत्रित करने और दौरे के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं। अस्थमा से पीडि़त लोगों को इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड युक्त उपचार मिलना चाहिए। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि सही देखभाल, समय पर उपचार और आवश्यक दवाओं की बेहतर उपलब्धता से अस्थमा से होने वाली कई मौतों को रोका जा सकता है। विश्व अस्थमा दिवस पहली बार वर्ष, 1998 में मनाया गया था। इसकी शुरुआत ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा की ओर से विश्व स्तर पर अस्थमा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी। पहला आयोजन स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित पहली विश्व अस्थमा बैठक से जुड़ा था। तब से यह दिन एक प्रमुख वैश्विक जागरूकता कार्यक्रम के रूप में विकसित हो गया है। वर्तमान में दुनिया भर में 30 करोड़ लोग अस्थमा से प्रभावित हैं। भारत में 4 करोड़ से ज्यादा केस नए आते हैं।

