भारत सरकार ने FY2026–27 के लिए समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 62 नए जहाज जोड़ने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत कुल ₹.51,383करोड़ का निवेश किया जाएगा, जिससे लगभग 2.85मिलियन ग्रॉस टन क्षमता में वृद्धि होगी। यह फैसला देश को समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। हाल ही में उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक में Strait Of Hormuz की स्थिति की समीक्षा के दौरान भारत की शिपिंग क्षमता को तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस बैठक में भविष्य के लिए मजबूत और आधुनिक समुद्री ढांचा तैयार करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने देश की शिपिंग क्षमता के त्वरित विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से कंटेनर जहाज, एलपीजी वाहक, कच्चे तेल के टैंकर और हरित टग्स जैसे जहाजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई, ताकि वैश्विक स्तर पर किसी भी व्यवधान का सामना किया जा सके। मंत्री ने विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में कार्गो प्रवाह, जहाजों की आवाजाही और संचालन की तैयारी की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और देश की सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए कंटेनर फ्लीट, हरित टग्स, एलपीजी और कच्चे तेल के वाहकों के साथ-साथ ड्रेजिंग जहाजों और टैंकरों का विस्तार जरूरी है।
इसके अलावा, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और तेल सार्वजनिक उपक्रमों के बीच 59 जहाजों की खरीद के लिए चल रहे संयुक्त उद्यम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि भारत को अपने जहाज बेड़े, जहाज निर्माण क्षमता, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और पूरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट लक्ष्य और समयबद्ध योजना के साथ एक ठोस श्वेत पत्र तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सोनोवाल ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, रसायन और उर्वरक तथा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालयों के साथ समन्वय को बेहद जरूरी बताया, क्योंकि ये सभी समुद्री सप्लाई चेन से सीधे जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि तैयार किया जाने वाला दस्तावेज अगली अंतर-मंत्रालयी समीक्षा का आधार बनेगा और इसमें व्यावहारिक तथा परिणाम आधारित सुझाव शामिल होने चाहिए।

