भारत के अधिकांश राज्यों में इन दिनों गर्मी ने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में गर्मी चरम पर है। दोपहर होते-होते सडक़ें वीरान नजर आने लगती है। वहीं गर्मी शुरू होते ही जगह-जगह पानी की किल्लत शुरू हो गई है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में तो दूरदराज के इलाकों से महिलाओं और पुरुषों को नलकूपों और बावडिय़ों से पानी भरकर लाना पड़ता है। इसे देखते हुए केंद्र और राजस्थान सरकार ने पेयजल संकट को रोकने के लिए एक विशेष समर कंटिंजेंसी प्लान भी तैयार किया है। वहीं केंद्र सरकार ने भी जल जीवन मिशन की अवधि को बढ़ाकर वर्ष, 2028 कर दिया है, जिसमें मार्च महीने में ही राजस्थान के साथ एक सुधार-आधारित एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के तहत जल स्रोतों की निरंतरता सुनिश्चित करने और जल आपूर्ति प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। वहीं वर्ष, 2026 तक राजस्थान प्रदेश के 90 फीसदी से अधिक क्षेत्रों को सतही जल से जोडऩे की योजना है, जिससे भूजल पर निर्भरता कम हो सके। जल संकटग्रस्त ब्लॉकों में सामुदायिक नेतृत्व वाली वाटर बजटिंग और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन सभी योजनाओं को लाकर सरकार का पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित, टैंकर निर्भरता कम करना और जल शक्तिअभियान को गति देना है। राजस्थान सरकार की 41 जिलों में निर्बाध पानी की आपूर्ति के लिए 200 करोड़ रुपए से अधिक का विशेष बजट मंजूर किया है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 154.83 करोड़ रुपए और शहरी क्षेत्रों के लिए 55.88 करोड़ रुपए का फंड मंजूर किया गया है। इसके अलावा 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पानी के टैंकरों के लिए भी विशेष फंड आवंटित किया है। इसके अलावा अवैध कनेक्शन और बूस्टर पंपों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं गर्मी में पेयजल संकट से निपटने के लिए, 450 से अधिक तकनीकी टीमों की ओर से1500 से अधिक खराब हैंडपंपों को ठीक करने का अभियान चलाया जा रहा है। ईसरदा बांध के 90 फीसदी कार्य को पूरा कर लिया गया है, ताकि इस मानसून में पानी का बेहतर भंडारण किया जा सके।

