Thursday, July 16, 2026 |
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दवा खोज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता बनेगी गेम चेंजर, विशेषज्ञों ने बताया भविष्य का रास्ता

by Business Remedies
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Experts discuss AI in drug discovery at India Pharma Summit

नई दिल्ली,

स्वास्थ्य क्षेत्र में नई तकनीक का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) दवा खोज की प्रक्रिया को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे सटीक इलाज की दिशा में प्रगति होगी और नवाचार आधारित स्वास्थ्य तंत्र को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल पुरानी प्रणालियों को डिजिटल रूप देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को नए तरीके से विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत डाटा और तकनीकी आधार तैयार किए बिना AI का व्यापक उपयोग संभव नहीं है। साथ ही, स्वचालन से क्लीनिकल कार्यों की दक्षता में तत्काल सुधार देखा जा सकता है।

‘India Pharma 2026’ के नौवें संस्करण के पहले दिन चार महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें नीति निर्धारकों, उद्योग से जुड़े प्रमुख लोगों, नियामकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। इन सत्रों में भारत के औषधि और जीवन विज्ञान क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करने पर विचार-विमर्श हुआ। पहले सत्र में नीति और उसके क्रियान्वयन के बीच मौजूद अंतर को जल्द दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी ने अनुसंधान और विकास के लिए उद्योग-आधारित मॉडल को अपनाने, सरकारी प्रयोगशालाओं के नेटवर्क को मजबूत करने और नियामक प्रणाली को यूरोपीय मानकों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता बताई।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव राजीव बहल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अनुसंधान के लिए धन में कई गुना वृद्धि हुई है, लेकिन देश को अपने अनुसार अनुसंधान मॉडल विकसित करना होगा। इसके लिए नवाचार करने वालों पर बाजार का विश्वास और उद्योग तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, उद्योग जगत के नेताओं ने अनुसंधान आधारित कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए अधिक निवेश और सह-वित्तपोषण की आवश्यकता जताई। साथ ही, उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के बीच बेहतर सहयोग और एकीकृत तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया, जिससे प्रारंभिक खोजों को वैश्विक समाधान में बदला जा सके।

दूसरे सत्र में एक ऐसी नियामक व्यवस्था बनाने पर चर्चा हुई जो स्पष्ट, प्रभावी और वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। भारत के औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने कहा कि सभी पक्षों से परामर्श लेकर ही बेहतर नियामक प्रणाली तैयार की जा सकती है। तीसरे सत्र में औषधि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें बताया गया कि यह तकनीक दवा निर्माण से लेकर वितरण तक पूरी प्रक्रिया को बदल सकती है। चौथे सत्र में वैश्विक स्तर पर अनुबंध आधारित अनुसंधान, विकास और विनिर्माण क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस क्षेत्र का वर्तमान आकार लगभग 8 अरब डॉलर है और यह 10 से 12 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़ रहा है, जो वैश्विक मांग को दर्शाता है।



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