चालीस दिनों बाद गत दिनों ही दो हफ्तों के लिए ईरान-अमेरिका सीजफायर होने से भारत में तेल-गैस, एविएशन और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख उद्योगों को तत्काल राहत मिलेगी। इससे महंगाई कम, रुपया मजबूत और शेयर बाजार में तेजी आने की पूरी उम्मीद है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से शिपिंग और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, जिससे व्यापार सुधरेगा। आयात व निर्यात भी बढ़ सकेगा। वहीं कच्चा तेल सस्ता होने की उम्मीद है। ईरान से तेल की आपूर्ति फिर से शुरू होने के संकेत हैं, जिससे भारतीय रिफाइनरियों की ईंधन लागत कम होगी। एयरलाइन कंपनियों को ईंधन सस्ता होने से सीधा फायदा मिलेगा और उनका मुनाफा बढ़ सकता है। इसके अलावा परिवहन लागत घटने से गाडिय़ों की मांग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सुधार होगा। स्टील और मेटल उद्योग पर सबसे ज्यादा फर्क पड़ेगा, क्योंकि इन उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं। कपड़ा उद्योग पर भी असर पड़ेगा क्योंकि कपास और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढऩा है। रसायन उद्योग भी प्रभावित होगा, क्योंकि रसायनों की कीमतें 40 फीसदी तक बढ़ गई हैं। अब इनके सस्ते होने की उम्मीद है। वहीं उर्वरक उद्योग पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि उर्वरकों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं। प्लास्टिक उद्योग भी फर्क पड़ेगा, क्योंकि प्लास्टिक बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं। सीजफायर से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों से राहत मिल सकेगी। वहीं एक तरफ वैश्विक जोखिम कम होने से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, जिससे भारतीय बाजार में स्थिरता और तेजी आएगी। पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर या कम होने से आम आदमी के घरेलू बजट पर दबाव कम हो सकेगा।

