New Delhi,
वैश्विक स्तर पर बढ़ते geopolitical conflict का असर अब भारत की economy पर भी दिखने लगा है, लेकिन इसके बावजूद देश की आर्थिक वृद्धि दर स्थिर रहने की उम्मीद जताई गई है। मॉर्गन स्टैनली की ताजा report के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में भारत की GDP growth लगभग 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले यह अनुमान 6.5 प्रतिशत था, जिसे अब घटाया गया है। इस revision के पीछे मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं, जो औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने का अनुमान है। महंगे ऊर्जा आयात के कारण उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिससे महंगाई पर भी असर पड़ रहा है। साथ ही, इसका दबाव भारतीय मुद्रा पर भी देखा जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन परिस्थितियों के चलते निकट अवधि में आर्थिक वृद्धि और कमजोर हो सकती है। June 2026 quarter में GDP growth घटकर लगभग 5.9 प्रतिशत तक आ सकती है। यह गिरावट मुख्य रूप से धीमी औद्योगिक गतिविधियों, कड़े वित्तीय हालात और घटते लाभ मार्जिन के कारण होगी।
आगे सुधार की उम्मीद
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समय के साथ स्थिति में सुधार हो सकता है। जैसे-जैसे supply conditions बेहतर होंगी और सरकार के समर्थन उपाय लागू होंगे, आर्थिक वृद्धि धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में औसत consumer price inflation लगभग 5.1 प्रतिशत रहने की संभावना है। बढ़ती input लागत, कमजोर मुद्रा और खाद्य व अन्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें महंगाई को ऊंचा बनाए रखेंगी। यदि कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती है, तो retail fuel prices में वृद्धि हो सकती है, जिससे महंगाई पर और अधिक दबाव पड़ेगा।
बाहरी क्षेत्र पर भी असर
भारत की external स्थिति पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है। current account deficit बढ़कर GDP का लगभग 2.5 प्रतिशत हो सकता है, जो पहले करीब 1 प्रतिशत था। इसका मुख्य कारण बढ़ता तेल आयात बिल है। पूंजी प्रवाह की गति धीमी रहने के कारण balance of payments लगातार तीसरे वर्ष घाटे में रह सकता है, जिससे भारतीय मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बनेगा। स्थिति को संभालने के लिए सरकार शुरुआती तौर पर fiscal measures का सहारा ले सकती है, जिसमें subsidy बढ़ाना और लागत नियंत्रण के प्रयास शामिल हैं। इसके चलते fiscal deficit बढ़कर GDP का लगभग 4.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

