Monday, July 27, 2026 |
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पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित, अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

by Business Remedies
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SEBI Chairman Tuhin Kant Pandey's address at the conference

New Delhi,

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था बाधित हो रही है। इस स्थिति से तेल और गैस की उपलब्धता पर दबाव बन रहा है और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।= उन्होंने 19वें सीआईआई कॉरपोरेट गवर्नेंस सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान कहा कि यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। पांडे के अनुसार, यह स्थिति उन कई झटकों की कड़ी में जुड़ गई है जिनका सामना पिछले कुछ वर्षों में व्यवसायों और नियामकों को करना पड़ा है, जैसे कोविड-19 महामारी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तेज तकनीकी बदलाव।

नियामकीय ढांचे में लगातार सुधार

सेबी प्रमुख ने बताया कि नियामकीय ढांचा समय के साथ संतुलित तरीके से विकसित हुआ है। इसमें खुलासे से जुड़े नियमों को मजबूत किया गया है, जिसमें समय-समय पर और घटनाओं के आधार पर जानकारी देना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही स्पष्ट मानक और समयसीमा तय की गई हैं तथा बोर्ड की स्वतंत्रता और निगरानी को भी मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सचिवीय ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं और अनुपालन अधिकारियों की भूमिका को भी अधिक प्रभावी बनाया गया है, जिससे कॉरपोरेट संचालन के मानकों को मजबूती मिली है।

कॉरपोरेट संचालन में गुणवत्ता पर जोर

पांडे ने कहा कि अब ध्यान केवल बोर्ड की संरचना पर नहीं बल्कि बैठक में होने वाली चर्चा और निर्णय लेने की गुणवत्ता पर होना चाहिए। उन्होंने स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके निरंतर प्रशिक्षण और ज्ञानवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर समीक्षा के बजाय लगातार निगरानी की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है, क्योंकि संस्थागत क्षमता ही बेहतर संचालन परिणाम सुनिश्चित करेगी।

आर्थिक दबाव और उद्योगों की चुनौतियां

वहीं, सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने बदलती परिस्थितियों पर तेजी से प्रतिक्रिया दी है, जिससे बाजार की भावना को स्थिरता मिली है। हालांकि, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और व्यापार क्षेत्रों में आपूर्ति से जुड़े दबाव अब भी बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, निर्यातकों और ऊर्जा-आधारित उद्योगों को संचालन और वित्तीय स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बनर्जी के अनुसार, आने वाले समय में नीतिगत कदमों का ध्यान लक्षित तरलता समर्थन, ऋण सुविधा और विदेशी मुद्रा स्थिरता सुनिश्चित करने पर होना चाहिए।



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