Mumbai,
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अनिश्चितता के कारण शुक्रवार को सोना और चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इन कीमती धातुओं की मांग में बढ़त देखी जा रही है।
सोने की कीमतों में मजबूत तेजी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना वायदा (2 अप्रैल) की कीमतों में करीब 2.27 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह प्रति 10 ग्राम 1 लाख 42 हजार 660 रुपये के दिन के उच्च स्तर तक पहुंच गया। बाद में सोना लगभग 1 लाख 42 हजार 500 रुपये पर कारोबार करता देखा गया, जो करीब 3 हजार 7 रुपये की बढ़त को दर्शाता है। कारोबार के दौरान सोना 1 लाख 40 हजार 287 रुपये के निचले स्तर तक भी गया, लेकिन इसके बावजूद इसमें 0.56 प्रतिशत यानी 794 रुपये की मजबूती बनी रही।
चांदी में भी जोरदार तेजी
चांदी वायदा (5 मई) में भी मजबूत तेजी देखने को मिली। इसकी कीमतों में लगभग 3.65 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई और यह प्रति किलोग्राम 2 लाख 27 हजार 901 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंच गई। सत्र के दौरान यह 2 लाख 23 हजार 515 रुपये के निचले स्तर तक गई, लेकिन बाद में करीब 2 लाख 27 हजार 799 रुपये पर कारोबार करती रही, जो लगभग 7 हजार 925 रुपये की बढ़त है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में जोखिम की भावना कमजोर हुई है। इस कारण निवेशकों ने सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। हालांकि, कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, जिससे निकट अवधि में अस्थिरता बनी रह सकती है।
घरेलू बाजार में मजबूत स्थिति
घरेलू स्तर पर सोना अभी भी 1 लाख 40 हजार रुपये के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर के ऊपर बना हुआ है, जो इसकी मजबूती को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतें 1 लाख 45 हजार रुपये के स्तर को पार करती हैं, तो यह 1 लाख 48 हजार से 1 लाख 50 हजार रुपये तक पहुंच सकती हैं। इसी तरह, चांदी भी 2 लाख 24 हजार रुपये के ऊपर मजबूती से बनी हुई है। यदि यह 2 लाख 30 हजार रुपये के स्तर को पार करती है, तो कीमतें 2 लाख 37 हजार से 2 लाख 40 हजार रुपये तक जा सकती हैं। वहीं, 2 लाख 18 हजार रुपये के नीचे आने पर मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि निकट अवधि में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक आर्थिक संकेतों और भू-राजनीतिक घटनाओं का इन पर सीधा प्रभाव पड़ता रहेगा। इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है और यह दो प्रतिशत से अधिक नीचे आ गई है, जिससे वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत मिल रहे हैं।

