Wednesday, March 11, 2026 |
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Exports बंद: युद्ध की चपेट में राज्य का चावल उद्योग

राजस्थान के बूंदी जिले से बड़ी मात्रा में जाता है मिडिल ईस्ट के देशों में चावल

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण भारत खासकर राजस्थान का चावल निर्यात गंभीर संकट में फंस गया है। निर्यात ठप होने और माल की खेप बंदरगाहों पर अटकने से देश व राजस्थान के चावल कारोबारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसका असर राजस्थान सहित उन राज्यों पर ज्यादा पड़ रहा है जहां से बड़ी मात्रा में चावल का निर्यात मिडिल ईस्ट के देशों को किया जाता है।
गौरतलब है कि राजस्थान के बूंदी जिले से मिडिल ईस्ट के देशों में बड़ी मात्रा में चावल का निर्यात होता है। कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट के तनाव ने भारत के चावल निर्यात को झटका दिया है। बढ़ते फ्रेट, अटके हुए कंटेनर और नए ऑर्डर में गिरावट के कारण चावल उद्योग दबाव में है। यदि जल्द हालात सामान्य नहीं हुए तो राजस्थान सहित देश के चावल व्यापारियों के सामने मंदी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
मिडिल ईस्ट तनाव से थमा चावल कारोबार
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़े सैन्य तनाव और समुद्री मार्गों पर जोखिम के कारण भारत व राजस्थान के निर्यातकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और बैंकिंग तथा भुगतान संबंधी अनिश्चितता भी बढ़ गई है। इसके चलते कई निर्यात ऑर्डर रोके जा रहे हैं या टाल दिए गए हैं। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव के कारण जहाजों के मार्ग बदलने पड़े हैं, जिससे परिवहन समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं। इससे चावल जैसे बड़े पैमाने के कृषि निर्यात पर सीधा असर पड़ा है।
लगभग 4 लाख टन चावल की खेप फंसी
मिडिल ईस्ट संकट के चलते भारत व राजस्थान से भेजे जाने वाले चावल की बड़ी खेप बंदरगाहों पर अटक गई है। करीब 4 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल या तो भारतीय बंदरगाहों पर रुका हुआ है या ट्रांजिट में फंसा हुआ है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार 1.4 लाख टन से अधिक बासमती चावल की खेप अलग-अलग राज्यों से भेजी जानी थी, जो अब निर्यात नहीं हो पा रही है। इस स्थिति से निर्यातकों को करोड़ों रुपए का नुकसान होने की आशंका है।
बढ़े फ्रेट से घाटे में सौदे
निर्यात पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन जो थोड़ा बहुत माल भेजा भी जा रहा है। वह महंगे फ्रेट (शिपिंग लागत) के कारण लाभदायक नहीं रह गया है। एशिया से मिडिल ईस्ट जाने वाले कंटेनर का फे्रट पहले 1200 से 1800 डॉलर प्रति कंटेनर था। अब यह बढक़र 3500 से 4500 डॉलर तक पहुंच गया है। यानि शिपिंग लागत लगभग तीन गुना तक बढ़ गई है, जिससे कई निर्यात सौदे लाभदायी साबित नही हो रहे है।
मिडिल ईस्ट भारतीय चावल का बड़ा बाजार
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है और वैश्विक निर्यात में लगभग 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने लगभग 20.19 मिलियन टन चावल निर्यात किया। बासमती चावल के मामले में मिडिल ईस्ट सबसे बड़ा बाजार है। सऊदी अरब, इराक, ईरान, यूएई और यमन भारत के प्रमुख आयातक हैं। इन पांच देशों का बासमती निर्यात में लगभग 61 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। उदाहरण के तौर पर सऊदी अरब ने करीब 10.9 लाख टन, ईरान ने करीब 6.7 लाख टन बासमती चावल आयात किया।
राजस्थान के कारोबारियों पर बढ़ा संकट
राजस्थान में बड़ी संख्या में चावल प्रोसेसिंग और ट्रेडिंग इकाइयां मिडिल ईस्ट के बाजार पर निर्भर हैं। राज्य के कई निर्यातक दुबई, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे देशों को बासमती चावल भेजते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में नए ऑर्डर कम मिल रहे हैं। शिपिंग जोखिम बढ़ गया है। भुगतान और बीमा को लेकर अनिश्चितता है। ऐसे में कारोबारियों को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।
लंबा चला संकट तो गहरा हो सकता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा चलता है तो इसका असर भारत के कृषि निर्यात पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। पश्चिम एशिया भारत व राजस्थान के कृषि उत्पादों का बड़ा बाजार है और यहां होने वाले व्यवधान से करीब 11.8 अरब डॉलर (लगभग 98 हजार करोड़ रुपए) के कृषि निर्यात पर खतरा मंडरा सकता है।

राजस्थान से सबसे ज्यादा चावल निर्यात मिडिल ईस्ट के देशों में होता है। समस्या सबसे बड़ी शिपमेंट की है, जहाज नहीं जा पा रहे हैं। बाकी समस्याएं तो बाद की हैं। अगर जहाज चले जाएं तो एक्सपोर्ट में कोई रुकावट नहीं आएगी। दूसरा जो थोड़ा बहुत चावल जा रहा है, वहां कंटेनर के रेट काफी हाई हो गए है, जिससे चावल का निर्यात करना पोशा नहीं खा रहा है। अगर सभी चीजों में लागत बढ़ जाएगी तो उत्पादक को उसका सही मूल्य नहीं मिल पाएगा।
– नीरज कुमार गोयल, अध्यक्ष, श्री चावल उद्योग संघ, बूंदी
निर्यात नहीं होने से चावल का बाजार टूटा हुआ है। राजस्थान से बासमती चावल का निर्यात ज्यादा होता है। प्रदेश के बूंदी, हनुमानगढ़ जिलों में ज्यादा चावल उत्पादन होता है और यहीं से चावल का एक्सपोर्ट मिडिल ईस्ट के देशों में होता है। चावल की किस्म 1121, 1718 व सुगंधा का निर्यात ज्यादा होता था, जो तनाव के चलते थम गया है। निर्यात थमने से बाजार में करीब 8 से 9 रुपए की मंदी आ गई है। दूसरा जो थोड़ा बहुत निर्यात हो रहा है, वह महंगा पड़ रहा है।
– बाबूलाल गुप्ता, चेयरमैन, राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ



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