Wednesday, May 20, 2026 |
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चीन में ऐप और डिवाइस का बिखरा तंत्र ‘एजेंटिक एआई’ के विकास में बड़ी बाधा

by Business Remedies
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Illustration from the report on the agentic AI and mobile app ecosystem in China

New Delhi,

चीन में उभर रही एजेंटिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक के सामने बड़ी चुनौती सामने आई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल ऐप और डिजिटल उपकरणों का बिखरा हुआ तंत्र इस तकनीक के विकास में गंभीर बाधा बन रहा है। लॉफेयर मीडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि एजेंटिक एआई तभी सफल हो सकती है जब वह अलग-अलग एप्लिकेशन और जुड़े हुए उपकरणों के बीच बिना रुकावट के काम कर सके। लेकिन चीन के मोबाइल पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद अलग-अलग बंद प्लेटफॉर्म इस तरह की आपसी संगतता को रोक देते हैं।

सुपर ऐप का बंद ढांचा बन रहा बाधा

रिपोर्ट के अनुसार, चीन में लोकप्रिय “सब कुछ करने वाले” ऐप जैसे वीचैट और अलीपे अपने भीतर एक बंद डिजिटल ढांचा बनाते हैं। इस कारण एआई एजेंट इन प्लेटफॉर्म के भीतर मौजूद कैलेंडर, ईमेल, चैट रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़ी जानकारी तक आसानी से पहुंच नहीं पाते। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन ऐप्स को व्यापक अनुमति दे भी दी जाए, तो इससे उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी और डेटा सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। रिपोर्ट में इसे पश्चिमी देशों में ओपनक्लॉ और चीन में डौबाओ फोन को लेकर उठे विवाद का मुख्य कारण बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एआई एजेंट जब किसी ऐप के जरिए कोई कार्य पूरा करने की कोशिश करता है तो उसे उस ऐप के भीतर मौजूद जानकारी तक पहुंच की जरूरत होती है। उदाहरण के तौर पर, अगर वीचैट पर किसी व्यक्ति ने डिनर की योजना से जुड़ा संदेश भेजा है और एआई एजेंट उस संदेश को पढ़कर आगे की कार्रवाई करना चाहता है, तो वह ऐसा नहीं कर पाएगा क्योंकि ऐप का बंद ढांचा उसे अनुमति नहीं देता।

डौबाओ फोन को लेकर बढ़ा विवाद

रिपोर्ट में बताया गया कि डौबाओ फोन में मौजूद एआई एजेंट स्क्रीन को पढ़कर किसी उपयोगकर्ता की तरह काम करने में सक्षम है। लेकिन इसी क्षमता के कारण चीन के कई बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म सतर्क हो गए। ताओबाओ, अलीपे और वीचैट जैसे प्रमुख ऐप ने इस एजेंट को अपने प्लेटफॉर्म से ब्लॉक कर दिया। कंपनियों को आशंका है कि इस तकनीक से धोखाधड़ी और संवेदनशील डेटा के उजागर होने का खतरा बढ़ सकता है। चीन में गूगल सेवाओं पर प्रतिबंध होने के कारण वहां के स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने अपने-अपने वैकल्पिक डिजिटल ढांचे विकसित किए हैं। ये ढांचे एंड्रॉयड के ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होते हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि अगर कोई उपयोगकर्ता एक कंपनी के फोन से दूसरी कंपनी के फोन पर जाता है, तो उसे ऐप स्टोर, क्लाउड सेवाएं, डिजिटल सहायक, पुश नोटिफिकेशन और अन्य कई सेवाएं भी बदलनी पड़ती हैं।

डेवलपर के सामने भी बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार, ऐप डेवलपर को भी अलग-अलग कंपनियों के फोन के लिए अपने सॉफ्टवेयर को अलग तरीके से ढालना पड़ता है। अगर वे अलग-अलग देशों और उपकरणों पर अपने ऐप को उपलब्ध कराना चाहते हैं, तो उन्हें हर निर्माता के निजी तकनीकी स्तर के अनुसार बदलाव करने पड़ते हैं। इस स्थिति से चीन के विनिर्माण और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में भ्रम और जटिलता बढ़ रही है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन के भीतर एजेंटिक एआई के लिए नियम और तकनीकी मानक तय करने को लेकर प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है। जो संस्थान या कंपनियां इस प्रतिस्पर्धा में आगे निकलेंगी, वही डेटा तक पहुंच, सुरक्षा प्रमाणन और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के लिए दिशा-निर्देश तय करेंगी। इससे भविष्य में एजेंटिक एआई के विकास का मार्ग भी निर्धारित होगा।



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