New Delhi,
भारत का हाउसिंग बाजार वैश्विक बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। एक ताजा Report के अनुसार, देश के आवासीय संपत्ति मूल्यों में वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 9.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़त के साथ भारत दुनिया के शीर्ष दस बाजारों में शामिल हो गया है। Report में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग, बेहतर सामर्थ्य और स्थिर व्यापक आर्थिक माहौल ने कीमतों को सहारा दिया है। रियल एस्टेट सेवा कंपनी नाइट फ्रैंक की Report के अनुसार, देश के शीर्ष आठ शहरों में वर्ष 2025 के दौरान आवासीय बिक्री 3.48 लाख से अधिक इकाइयों पर स्थिर रही। वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में बिक्री का स्तर वर्ष 2013 के बाद सबसे ऊंचा रहा, जो बाजार में निरंतर मांग का संकेत देता है।
Report में बताया गया कि बाजार के स्वास्थ्य संकेतक संतुलित बने हुए हैं। क्वार्टर-टू-सेल अनुपात 5.8 क्वार्टर पर स्थिर रहा, जबकि बिना बिके मकानों की संख्या में वृद्धि देखी गई। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से उच्च मूल्य वाली परियोजनाओं के अधिक लॉन्च के कारण हुई है। कीमतों में वृद्धि व्यापक स्तर पर दर्ज की गई। नेशनल कैपिटल रीजन में सबसे अधिक 19 प्रतिशत की बढ़त रही। इसके बाद हैदराबाद में 13 प्रतिशत, बेंगलुरु में 12 प्रतिशत और मुंबई में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि प्रमुख महानगरों में आवासीय मांग मजबूत बनी हुई है।
Report में कहा गया है कि प्रीमियम और मिड-टू-प्रीमियम श्रेणी के मकानों में अधिक मांग देखी गई है। ब्याज दरों में क्रमिक कटौती, नियंत्रित महंगाई और घरेलू आय में वृद्धि ने इस रुझान को समर्थन दिया है। एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव भी सामने आया है। Rs.1करोड़ से अधिक कीमत वाले मकानों की हिस्सेदारी कुल आवासीय बिक्री में लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। डेवलपर्स ने नई परियोजनाओं की शुरुआत में संयम बरता है और कीमतों में कटौती करने के बजाय वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से बिक्री बनाए रखने पर ध्यान दिया है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि भारत का हाउसिंग बाजार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अलग पहचान बनाए हुए है। मजबूत आर्थिक वृद्धि, वित्तीय परिस्थितियों में सुधार और अंतिम उपयोगकर्ताओं की मांग में बढ़ोतरी ने आवासीय चक्र को अधिक परिपक्व और मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में बाजार स्थिर मांग, सीमित कीमत वृद्धि और नियंत्रित आपूर्ति के आधार पर आगे बढ़ेगा, न कि सट्टा गतिविधियों के कारण। वैश्विक स्तर पर देखें तो Q3 2025 में आवासीय बाजारों में कीमतों की वृद्धि में हल्का सुधार दर्ज किया गया, क्योंकि मौद्रिक परिस्थितियों में नरमी का असर मांग पर दिखाई देने लगा है।

