Saturday, March 14, 2026 |
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Union Budget में बढ़ी STT दरों पर नितिन कामथ की चिंता

राजस्व संग्रह पर प्रभाव की आशंका

by Business Remedies
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Nithin Kamath speaking about STT increase and revenue impact

मुंबई,

Zerodha के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बार-बार की जा रही बढ़ोतरी को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि कर दरों में वृद्धि से बाजार में ट्रेडिंग गतिविधियां धीरे-धीरे प्रभावित हो रही हैं और इसका सीधा असर राजस्व संग्रह पर पड़ सकता है।

कामथ ने हाल ही में सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखे एक संदेश में बताया कि जब दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (LTCG) को शून्य किया गया था, उसी समय STT लागू किया गया था। लेकिन बाद में LTCG दोबारा लागू कर दिया गया, इसके बावजूद प्रत्येक Union Budget में STT की दर बढ़ती रही है। उन्होंने कहा कि एक बाजार सहभागी के रूप में वे हमेशा उम्मीद करते हैं कि बजट में STT कम किया जाएगा, लेकिन इसके उलट इसमें लगातार वृद्धि की जा रही है। उनके अनुसार, वर्ष 2024 के Budget में वायदा और विकल्प (F&O) सौदों पर STT में 60 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी की गई थी। वायदा सौदों पर कर दर 0.0125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.02 प्रतिशत कर दी गई, जबकि विकल्प सौदों पर यह 0.0625 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.1 प्रतिशत कर दी गई।

कामथ का कहना है कि उस समय बाजार में तेज़ी का दौर चल रहा था और निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही थी, इसलिए इस बढ़ोतरी का असर तुरंत दिखाई नहीं दिया। लेकिन बाजार में हमेशा तेजी नहीं रहती। पिछले एक वर्ष में जब बाजार की स्थिति सामान्य हुई और उतार-चढ़ाव बढ़ा, तब ऊंची कर दरों का असर ट्रेडिंग वॉल्यूम पर दिखने लगा। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार द्वारा STT संग्रह के अनुमान का भी उल्लेख किया। सरकार ने लगभग Rs.78000 करोड़ का लक्ष्य रखा था। हालांकि, 11 January तक लगभग Rs.45000 करोड़ का ही संग्रह हो सका था। यदि March के अंत तक और Rs.12000 करोड़ भी जुड़ जाते हैं, तो कुल संग्रह लगभग Rs.57000 करोड़ के आसपास रहेगा, जो लक्ष्य से करीब 25 प्रतिशत कम होगा।

कामथ ने कहा कि यदि वर्ष 2024 में STT की दरों में वृद्धि नहीं की गई होती, तो संभव है कि सरकार को अधिक राजस्व प्राप्त होता। उनके अनुसार, अत्यधिक कर दरें कभी-कभी अपेक्षित राजस्व वृद्धि के बजाय बाजार गतिविधियों में कमी ला सकती हैं, जिससे कुल संग्रह प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रेडिंग लागत बढ़ती है, तो छोटे निवेशक और अल्पकालिक कारोबारी बाजार से दूरी बना सकते हैं। इससे पूंजी बाजार की तरलता पर प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले Union Budget में STT दरों को लेकर बाजार सहभागियों की निगाहें टिकी रहेंगी।



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