Wednesday, August 12, 2026 |
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Union Budget 2026 से पहले बाजार में अनिश्चितता, Nifty और Sensex में गिरावट के संकेत

by Business Remedies
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Nifty And Sensex Volatility Ahead Of Union Budget 2026

नई दिल्ली, 

Union Budget 2026-27 पेश होने से पहले शेयर बाजार में अक्सर दबाव देखा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2010 से 2022 तक के आंकड़े बताते हैं कि Budget से पहले निवेशकों में नीतिगत घोषणाओं को लेकर अनिश्चितता रहती है, जिससे Nifty और Sensex में गिरावट का रुख बनता है। हालांकि Budget के बाद अक्सर सुधार भी देखा गया है और औसतन अगले सप्ताह बाजार में 1.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि Budget से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है। Budget Day पर औसतन 2.65 प्रतिशत का दायरा देखने को मिला है, जो अनिश्चितता को दर्शाता है। पिछले 15 वर्षों में Budget से एक सप्ताह पहले Nifty का औसत रिटर्न -0.52 प्रतिशत रहा है और सूचकांक केवल 8 बार ही बढ़त के साथ बंद हुआ। पिछले पांच वर्षों में से चार बार Budget से पहले वाले महीने में Nifty ने नकारात्मक प्रदर्शन किया, जिसमें January 2025 की गिरावट भी शामिल है।

विशेषज्ञ राहुल शर्मा ने कहा कि Union Budget 2026 में सरकार के सामने राजकोषीय अनुशासन और विकास को बढ़ावा देने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। वैश्विक परिस्थितियों और बाहरी आर्थिक दबावों के बीच सरकार से बुनियादी ढांचा, रक्षा और रेल क्षेत्रों में पूंजीगत खर्च बढ़ाने की उम्मीद है। रक्षा आवंटन में वृद्धि की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखा जा सके। उद्योग जगत ने लघु और मध्यम उद्यमों, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और निर्यात क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन उपायों की मांग की है। कर वापसी में तेजी और ढांचागत निवेश बढ़ाने जैसे कदमों से औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है। रोजगार सृजन, ग्रामीण मांग और सतत विकास पर विशेष ध्यान देकर भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा जा सकता है।

हालांकि जोखिम भी कम नहीं हैं। Budget Day पर अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका रहती है और यदि घोषणाएं उम्मीद के अनुरूप नहीं रहीं तो बिकवाली बढ़ सकती है। इससे बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने और बाजार में नकदी की स्थिति प्रभावित होने की संभावना रहती है। भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापार में बाधाएं भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकती हैं। विश्लेषकों ने चेताया है कि विदेशी निवेश की निकासी और ऊंचे मूल्यांकन जैसी चिंताएं भी बाजार की तेजी को सीमित कर सकती हैं। निवेशकों को सलाह दी गई है कि Budget के बाद स्थिति स्पष्ट होने तक सतर्क रणनीति अपनाएं और रक्षा तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों जैसे क्षेत्रों में चुनिंदा अवसरों पर ध्यान दें।

CareEdge Ratings के अनुसार FY26 में राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत पर सीमित रह सकता है। FY27 में यह 4.2-4.3 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है। FY27 के दौरान सकल उधारी लगभग Rs.16-17 Trillion और शुद्ध उधारी करीब Rs.11.5-12 Trillion रहने की संभावना जताई गई है।



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