बिजनेस रेमेडीज/मुंबई (आईएएनएस)। अगस्त महीने में म्यूचुअल फंड्स ने शेयर बाजार में जोरदार खरीदारी की और 70,500 करोड़ रुपये की शुद्ध निवेश राशि लगाई। यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में सबसे अधिक 90,770 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई थी। अगस्त की यह मजबूती जुलाई के 42,702 करोड़ रुपये के निवेश के बाद आई है, जो बताती है कि फंड मैनेजर लगातार सेकेंडरी मार्केट में खरीदारी बढ़ा रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेजी स्वस्थ निवेश प्रवाह और उतार-चढ़ाव वाले बाजार में सक्रिय रणनीति का संकेत देती है। फिलहाल, देश का म्यूचुअल फंड उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और कुल परिसंपत्ति प्रबंधन (एयूएम) 74.40 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच चुका है। इनमें इक्विटी फंड्स का हिस्सा करीब 60 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी बढ़ रही है और अब वे उद्योग के कुल एयूएम का लगभग 17 प्रतिशत हैं। निवेशक पैसिव रणनीतियों की ओर इसलिए आकर्षित हो रहे हैं क्योंकि वे कम लागत, पारदर्शिता और बाजार मानकों के अनुरूप बेहतर विकल्प मानी जाती हैं।
जून तिमाही में म्यूचुअल फंड्स में कुल 3.98 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध आमद दर्ज की गई। इसमें से 2.39 लाख करोड़ रुपये ऋण फंड्स से और 1.33 लाख करोड़ रुपये इक्विटी फंड्स से आए। सक्रिय निवेश रणनीतियों में फ्लेक्सी कैप, स्मॉल कैप और मिड कैप फंड्स निवेशकों की पसंद बने रहे, वहीं पैसिव लार्ज-कैप फंड्स में भी स्थिर निवेश देखने को मिला। विश्लेषकों का मानना है कि अगस्त में इक्विटी निवेश में आई यह तेज बढ़ोतरी बताती है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद फंड मैनेजर भारतीय बाजार की बुनियादी मजबूती को लेकर आत्मविश्वास से भरे हुए हैं।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का शुद्ध एयूएम जुलाई 2020 के 7.65 लाख करोड़ रुपये से बढक़र जुलाई 2025 में 33.32 लाख करोड़ रुपये हो गया है, यानी इसमें 335 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।

