- 5000 करोड़ के निर्यात और लाखों रोजगार पर मंडराया संकट
- बुरी तरह प्रभावित हो सकता है जोधपुर-जयपुर का हैंडीक्राफ्ट कारोबार
बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर व जोधपुर से हर साल हजारों करोड़ के हैंडीक्राफ्ट उत्पाद दुनियाभर में निर्यात होते हैं। लकड़ी, लोहा और चमड़े से बने ये उत्पाद खासतौर पर अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में भारी मांग रखते हैं, लेकिन अब इस पारंपरिक उद्योग पर अमेरिकी टैरिफ के कारण गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से होने वाले हैंडीक्राफ्ट निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लागू करने के निर्णय ने निर्यातक और कारीगरों की नींद उड़ा दी है।
लाखों कारीगरों पर असर
कारोबारियों की मानें तो जयपुर-जोधपुर से ही केवल अमेरिका को हर साल करीब 5000 करोड़ रुपए के हस्तशिल्प उत्पाद भेजे जाते हैं। अकेला अमेरिका ही हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का सबसे बड़ा ग्राहक देश है। अमेरिका भारत से 52 प्रतिशत हैंडीक्राफ्ट उत्पाद आयात करता है। इससे करीब 50 हजार से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से और 1 लाख से अधिक लोग अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जुड़े हैं। निर्यातको का कहना है कि अगर अमेरिकी बाजार से झटका लगता है तो इसका सीधा असर यहां के हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों, मजदूरों और कारीगरों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा। यदि यह काम छूट गया तो इसे दोबारा शुरू करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिका की सख्ती, प्रतियोगी देशों को फायदा
अमेरिका ने पहले भी भारत पर 26 प्रतिशत रिटेल टैरिफ और बाद में अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया था। अब अगर यह 25 प्रतिशत टैरिफ स्थायी रूप से लागू हो जाता है तो भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में टैरिफ के चलते 25 फीसदी तक महंगे हो जाएंगे। इसका सीधा फायदा वियतनाम, इंडोनेशिया, तुर्की जैसे देशों को होगा, जहां टैरिफ मात्र 10 से 20 फीसदी के बीच है। वहीं चीन को सरकारी सहायता मिलती है, जिससे भारत को पहले ही कड़ी चुनौती मिल रही है। कारोबारियों का कहना है कि इस विषय को डिप्लोमैटिक स्तर पर उठाना चाहिए और अमेरिका के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करनी चाहिए। साथ ही भारत को यूरोप, यूके और खाड़ी देशों के साथ नए व्यापार समझौते करने चाहिए ताकि अमेरिकी निर्भरता कम हो सके।
राजस्थान की पहचान बचाने की चुनौती
उल्लेखनीय है कि राजस्थान का हैंडीक्राफ्ट सिर्फ एक कारोबार नहीं, बल्कि यह प्रदेश के कई शहरों की पहचान भी है। इससे हजारों कारीगरों-मजदूरों को रोजी-रोजगार मिलता है, जिससे उनका जीवन चलता है। यदि यह उद्योग संकट में आता है तो केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर पर भी असर पड़ेगा। सरकार को समय रहते हस्तक्षेप करना होगा ताकि यह पारंपरिक उद्योग वैश्विक बाजार में टिक सके और लाखों लोगों की आजीविका बनी रहे।
7 अगस्त से पूर्णतया लागू होगा अमेरिकी टैरिफ
अमेरिका ने 68 देशों पर नया टैरिफ लागू किया है। इसमें भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। यह निर्णय 1 अगस्त 2025 से प्रभावी है और 7 अगस्त से पूर्णत: लागू हो जाएगा। अमेरिका के इस निर्णय से भारतीय हस्तशिल्प निर्यात पर गहरा असर पड़ेगा।
ये आएंगे असर
1. निर्यात लागत में तेजी से बढ़ोतरी होगी : 25 प्रतिशत का सीधा आयात शुल्क भारतीय उत्पादों की कीमत को अमेरिकी बाजार में काफी महंगा कर देगा। इससे भारत के हस्तशिल्प, लकड़ी, धातु और सजावटी उत्पादों की मांग घट सकती है, क्योंकि वे बाजार की प्रतिस्पर्धा में महंगे होने के कारण टिक नहीं पाएंगे। प्रतिस्पर्धात्मक नहीं रह जाएंगे।
2. अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी घटने की संभावना : बढ़े हुए टैरिफ के चलते भारत की अमेरिकी बाजार में स्थिति कमजोर हो सकती है। खासकर चीन या वियतनाम जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी, जिन पर टैरिफ या तो कम है या न के बराबर।
3. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पर बढ़ेगा दबाव : हस्तशिल्प क्षेत्र में बड़ी संख्या में कारीगर व लघु उद्यम कार्यरत हैं। बढ़े हुए टैरिफ से इनकी निर्यात आय में गिरावट आएगी, जिससे रोजगार और उत्पादन दोनों पर प्रभाव पड़ेगा।
4. चीन से लाभ की उम्मीद अब धूमिल : पहले उम्मीद की जा रही थी कि चीन पर लगे अमेरिकी टैरिफ का लाभ भारत को मिलेगा, लेकिन अब जबकि भारत पर भी 25 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया है, तो वह संभावित अवसर भी व्यावहारिक रूप से समाप्त हो गया है।
इस टैरिफ की वजह से व्यापार पर नेगेटिव इंपेक्ट आएगा। चाहे वह हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट हो या टैक्सटाइल एक्सपोर्ट सभी तरह के व्यापार पर नकारात्मक असर आएगा। भारत के यूनिक प्रोडक्ट पर असर नहीं आएगा, लेकिन जो देश समान उत्पाद बनाते हैं, उस पर असर आएगा। खरीदार रिर्सोसिंग करना शुरू कर देंगे। जो आर्डर पाइप लाइन में हैं कस्टमर पर डिस्काउंट की मांग भी कर सकते हैं। हालांकि भारत के प्रोडक्ट में भी काफी स्ट्रेंथ है। कई प्रोडक्ट ऐसे हैं, जो कम कीमत और अच्छे होने की वजह से बाजार में वियतनाम और इंडोनेशिया से मुकाबला करेंगे। हालांकि ग्राहक एक बार तो खरीदारी को स्लो करेगा। अन्य देशों में कंपटीशन चेक किया जाएगा। इसलिए बिजनेस में थोड़ा ठहराव आएगा।
– सुनीत जैन, अध्यक्ष, फोरेक्स और सीईओ, रतन टैक्सटाइल प्रा.लिमिटेड
भारत में हैंडीक्रॉफ्ट बिजनेस की 52 प्रतिशत सेल अमेरिका के ऊपर निर्भर है। इस व्यवसाय से करीब 10 लाख लोग जुड़े हुए हैं, जो हैंडीक्राफ्ट बनाते हैं और सेल करते हैं। इस टैरिफ की वजह से वियतनाम जो की भारत के प्रतिस्पर्धी हैं वह 10 प्रतिशत सस्ता हो जाता है और इंडोनेशिया भी 6 से 10 प्रतिशत तक सस्ता हो जाता है। इस टैरिफ के लगने के बाद भारत का माल अमेरिका में 25 से 30 प्रतिशत महंगा जो जाएगा। इससे ग्राहकों का रुझान भारत के उत्पादों के प्रति कम होगा। भारत के लिहाज से यह अच्छी खबर नहीं है। थोड़े समय तक संघर्ष चलेगा, इसके बाद भारत नए बाजार खोजेगा और अपना व्यापार फिर से पटरी पर ले आएगा। सरकार को इस विषय में कुछ सोचना होगा। इंसेंटिव देना होगा, जिससे व्यापार फिर से बढ़े।
– रवि उत्मानी, सचिव, फेडरेशन ऑफ राजस्थान हैंडीक्रॉफ्ट्स एक्सपोटर्स
भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ एक गंभीर चुनौती है, विशेषकर हस्तशिल्प और परंपरागत निर्यातकों के लिए। अमरीकी टैरिफ से बचने और अपने व्यापार को स्थिर रखने के लिए भारत को नए बाजार यूरोप, मध्य-पूर्व, ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों पर फोकस करना होगा। इसके अलावा ब्रांडिंग, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन के माध्यम से उत्पादों की नई पहचान बनानी होगी। साथ ही भारत को अमेरिका से टैरिफ कम करने की अपील करनी होगी। साथ ही भारत को रणनीतिक सोच, त्वरित अनुकूलन और नई बाजार रणनीतियों के जरिए इस संकट को अवसर में बदलने की आवश्यकता है।
– अभिषेक घीया, हस्तशिल्प कारोबारी, जयपुर

