Thursday, July 9, 2026 |
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Certificate से बढ़ रही रत्नों की विश्वसनीयता ब्लॉकचेन सर्टिफिकेशन से रत्नों की नई पहचान

मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म से पारदर्शिता से 25 प्रतिशत लाभ की संभावना, 2024 में जयपुर का रत्न और आभूषण निर्यात 15 फीसदी बढ़ा

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। पिंक सिटी अपनी रत्न और आभूषण कला के लिए विश्व प्रसिद्ध है, अब डिजिटल युग में कदम रख रहा है। 2024 में शुरू हुआ ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल ज्वैलरी मार्केट प्लेस प्लेटफॉर्म जयपुर के व्यवसाईयों को वैश्विक मंच प्रदान कर रहा है। यह पहल रत्नों और आभूषणों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए ब्लॉकचेन सर्टिफिकेशन का उपयोग करती है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास बढ़ा है। 2024 में जयपुर का रत्न और आभूषण निर्यात 15 प्रतिशत बढक़र 3.48 बिलियन डॉलर (लगभग 29,391 करोड़ रुपए) तक पहुंचा, जिसमें गोल्ड ज्वैलरी का निर्यात 19.57 प्रतिशत बढ़ा।

ब्लॉकचेन की भूमिका और लाभ: ब्लॉकचेन तकनीक रत्नों और आभूषणों की उत्पत्ति, गुणवत्ता और स्वामित्व का डिजिटल रिकॉर्ड रखती है। जौहरी बाजार के 1,200 से अधिक दुकानदारों ने इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण किया, जो कुंदन, मीनाकारी और पॉल्की ज्वैलरी की प्रामाणिकता को सत्यापित करता है। यह ग्राहकों को नकली उत्पादों से बचाता है और 25 प्रतिशत तक लाभ मार्जिन बढ़ाने की संभावना देता है। मई 2025 में रंगीन रत्नों का निर्यात 15.18 प्रतिशत गिरा, लेकिन ब्लॉकचेन से पारदर्शिता बढऩे से निर्यात में सुधार की उम्मीद है।

स्थानीय बाजारों का डिजिटलकरण:
जौहरी बाजार में सोने, चांदी और हीरे के आभूषण व बापू बाजार में बंधेज साडियां और मौजड़ी की बिक्री डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी है। चांदपोल के संगमरमर हस्तशिल्प और त्रिपोलिया की लाख की चूडिय़ां भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं। 2024 में 12 लाख पर्यटकों ने जयपुर के बाजारों में खरीदारी की, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म से 30 प्रतिशत बिक्री बढ़ी। स्मार्ट मार्केट ऐप के साथ एकीकरण से स्थानीय दुकानदारों को यूपीआई भुगतान और रियल-टाइम इन्वेंट्री प्रबंधन की सुविधा मिली है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: यह डिजिटल मार्केट प्लेस जयपुर की जीडीपी में रत्न और आभूषण उद्योग के 17 प्रतिशत योगदान को और मजबूत करेगा। 35 प्रतिशत महिला दुकानदारों की भागीदारी से सामाजिक सशक्तीकरण को बढ़ावा मिला है। 2025 तक उदयपुर और जोधपुर में विस्तार की योजना है, जिससे निर्यात में 20 प्रतिशत और वृद्धि संभव है। जयपुर का यह डिजिटल कदम स्थानीय कारीगरों और वैश्विक ग्राहकों को जोडक़र गुलाबी नगरी को रत्नों की डिजिटल राजधानी बना रहा है।

– जैम स्टोन में जयपुर दुनिया का सबसे बड़ा हब है। यहां पर 400 तरह के रंगीन रत्न तराशे जाते हैं। इनमें रूबी, माणक, नीलम और पुखरात और भी बहुत सारे रत्न में नवरत्न और महंगे स्टोन शामिल हैं। इन सभी की टेस्टिंग के लिए एक अधिकृत लैब जयपुर में बनाई गई है। इनमें जैम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल की लैब है। इस लैब की पूरे भारत में मान्यता है। अगर इस लैब का सर्टिफिकेट कराते हैं तो कहीं सर्टिफिकेट कराने की आवश्यकता नहीं है। दूसरे एमआई रोड पर एचआरडी नाम से एक लैब और खुली है। इसकी मान्यता पूरे विश्व में है। रत्नों के लैब में टेस्ट होने से व्यापारा भी बढ़ा है और लोगों का विश्वास भी बढ़ा है। रत्नों टेस्टिंग से रत्नों की विश्वसनीयता में काफी इजाफा हुआ है।
– राजू अग्रवाल मंगोड़ीवाला, वाइस प्रेसीडेंट, जयपुर ज्वेलर्स एसोसिएशन, को कनवीनर, जस

 

– हमारे यहां ज्यादा काम डायमंड का होता है। इसके लिए आईजीए का सर्टिफिकेट लगता है। ग्राहकों की विश्वसनीयता के लिए हम बिना आईजीए सर्टिफिकेट के डायमंड मार्केट में नहीं बेचते हैं। सर्टिफिकेशन से व्यापार बढ़ता है और ग्राहकों का विश्वास भी बढ़ता है। बड़े डायमंड के लिए जीआईए का सर्टिफिकेट लगता है। तैयार ज्वेलरी जैसे नेकलेस हो गया, उसके लिए आईजीए का सर्टिफिकेट अनिवार्य है। हम अपने स्टोर पर केवल आईजीए सर्टिफाइड डायमंड ही रखते है।
– रमाकांत जौहरी, सूर्यवंशी ज्वैलर्स, टोंक रोड, जयपुर



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