ईरान-इजरायल के बीच युद्ध लंबा खींचने के आसार
बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। कुंजेश कुमार पतसारिया | ईरान और इजरायल के बीच युद्ध इनदिनों भडक़ा हुआ है। अगर यह युद्ध लंबा चला तो भारत में क्रूड ऑयल और गैस की की सप्लाई पर असर पडऩा तय है। भारत की भी चिंताएं इस ओर बढऩे लगी है। युद्ध के कारण आशंकाएं यह भी जताई जा रही है कि हालत गंभीर होने पर ईरान स्ट्रेट ऑफ होरमुज को बंद कर सकता है। यह वो समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया भर में क्रूड ऑयल और गैस की सप्लाई होती है। इसके बंद होने का असर भारत में होने वाली सप्लाई पर भी पड़ेगा। इससे क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू सकती है यानि कीमतों में काफी तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि भारत सरकार ने इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए कदम उठाए हैं। वैकल्पिक रास्तों और स्त्रोतों की तलाश जुट गई है। भारत की नजर रूस, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीकी देशों और अन्य विकल्पों पर टिकी हुई है।
भारत की क्रूड ऑयल की निर्भरता
भारत जहां अपनी जरूरत का 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। इसमें सबसे ज्यादा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। भारत के कुल कच्चे तेल में से 35 फीसदी रूस से, 40 फीसदी से थोड़ा ज्यादा खाड़ी देशों और बाकी अफ्रीका, अमेरिका व अन्य देशों से आता है। अफ्रीका से अप्रैल के 12 फीसदी के मुकाबले मई में 5 फीसदी तेल ही आयात हुआ है। इन सबके बावजूद भारतीय रिफाइनरियां फिलहाल पैनिक बाइंग से बच रही हैं। तेल मंत्रालय के अनुसार भारत में 74 दिनों की राष्ट्रीय खपत के बराबर कच्चा तेल और पैट्रोलियम उत्पादों का भंडारण क्षमता है।
कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल
13 जून को इजरायल की ओर से ईरान पर एयर स्ट्राइक करने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है और यह तब से अब तक करीब 7 प्रतिशत महंगा हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड गत दिनों 0.93 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74.92 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73.83 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। 12 जून को ब्रेंट क्रूड का दाम 69.36 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम 66.64 डॉलर प्रति बैरल था। क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़त की वजह तेल संपन्न क्षेत्र में संघर्ष का लगातार बढऩा है। रिपोट््र्स के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के साउथ पारस गैस फील्ड पर हमला किया है, जिसके कारण वहां उत्पादन को रोकना पड़ा है।
घरेलू तेल बाजार में आएगी तेजी
युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ईरान के पास दुनिया भर के तेल भंडार का 12 फीसदी हिस्सा है। यदि युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
तेल सप्लाई पर पड़ेगा असर
ईरान और इजरायल के बीच युद्ध से स्टे्रट ऑफ होरमुज जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर बाधा उत्पन्न हो सकती है, जिससे भारत में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से अधिकांश खाड़ी देशों से आता है।
ईरान करता है प्रतिदिन 3.3 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन
एमके ग्लोबल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान प्रतिदिन लगभग 3.3 मिलियन बैरल (एमबीपीडी) कच्चे तेल का उत्पादन करता है और लगभग 1.5 एमबीपीडी का निर्यात करता है, जिसमें चीन 80 प्रतिशत भागीदारी के साथ मुख्य आयातक है।
भारत की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव
क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती हैं और तेल की आपूर्ति बाधित होती है, तो इससे भारत की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ सकती है और देश की विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ सकता है।
वर्जन
निश्चित रूप से ईरान और इजरायल के मध्य युद्ध लंबा खींचता है तो क्रूड ऑयल के दाम आसमान छू सकते है। ऐसे में भारत सरकार को वैकल्पिक रास्तों या देशों रशिया, सूडान या फिर नाइजीरिया से तेल की आपूर्ति शुरू कर देनी चाहिए, जिससे कू्रड ऑयल की कीमतों में स्थिरता बनी रहे। उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी नहीं झेलनी पड़े।
-सुरेश अग्रवाल, अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फोर्टी)
दोनों के बीच चल रहे युद्ध का इफेक्ट भारतीय बाजार पर आएगा। युद्ध चलता रहा तो पेट्रोल-डीजल के दरें बढऩा तय हैं। मांग के अनुरूप अगर पूर्ति नहीं होगी, तो पेट्रो पदार्थों के दाम बढऩा तय है। इससे आम आदमी का बजट भी गड़बड़ाएगा। पेट्रोल-डीजल के दाम बढऩे से देश में महंगाई बढऩा तय है।
-राजेंद्र सिंह भाटी,अध्यक्ष, राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन
ईरान-इजरायल के बीच बढ़ रहे तनाव से भारतीय घरेलू तेल बाजार में प्रभाव पडऩे लगा है। क्रूड ऑयल महंगे दामों में खरीदा जा रहा है। अगर युद्ध लंबा चला तो निश्चित रूप से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी। ऐसे में भारत सरकार को वैकल्पिक माध्यमों की तलाश शुरू कर वहां से क्रूड ऑयल की आपूर्ति शुरू कर देनी चाहिए ताकि भविष्य में इसके लिए उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों का बोझ नहीं झेलना ना पड़े।
-चाननमल अग्रवाल, अध्यक्ष, राजस्थान ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन

