हर साल जून का तीसरा रविवार बेहद खास होता है। दरअसल, यह दिन उन लोगों के लिए समर्पित होता है जो हर परिस्थिति में हमारे साथ मजबूती से खड़े रहते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘पिता’ की। साल 2025 में फादर्स डे 15 जून को मनाया जाएगा, जो सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक फीलिंग है उन अनकहे एहसासों की, जो एक पिता अपने बच्चों के लिए हर रोज जीता है। कभी डांट में छिपा प्यार, तो कभी खामोशी में छिपा सपोर्ट। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा है। यह दिन सिर्फ बायोलॉजिकल फादर के लिए नहीं है, बल्कि उन सभी के लिए है जो किसी की जिंदगी में पिता का स्थान निभाते हैं- दादा, मामा, बड़े भाई, शिक्षक या कोई मार्गदर्शक। यह उनके प्रेम, परवाह और सपोर्ट का सम्मान करने का दिन है। पिता दिवस को मुख्यधारा में लाने का श्रेय वाशिंगटन राज्य की सोनोरा स्मार्ट डोड को जाता है। मदर्स डे से प्रेरित होकर, सोनोरा अपने पिता, विलियम जैक्सन स्मार्ट को सम्मानित करना चाहती थीं। उनके पिता ने अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद छह बच्चों की अकेले परवरिश की थी। सोनोरा को लगा कि जैसे माताओं के लिए मदर्स डे है, वैसे ही पिताओं के लिए भी एक दिन होना चाहिए। उन्होंने जून के महीने में अपने पिता के जन्मदिन पर यह दिन मनाने का प्रस्ताव रखा और इस तरह 19 जून 1910 में पहली बार फादर्स डे मनाया गया।
आज जब पितृत्व की भूमिका पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकल रही है, पिता सिर्फ कमाने वाले या अनुशासन देने वाले नहीं रह गए हैं। वे अब सहारा भी हैं, साथी भी और बच्चों के पहले दोस्त भी। पिता आज बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट में हाथ बंटाते हैं, रात में बीमार बच्चे को दवा भी पिलाते हैं और इमोशनल सपोर्ट भी देते हैं। इसलिए फादर्स डे आज एक इमोशनल जरूरत बन चुका है, यानी एक छोटा-सा दिन, जो उन सारे अनकहे पलों को उजागर करता है।
फादर्स डे उन लोगों के लिए भी खास और कभी-कभी भावुक कर देने वाला दिन होता है, जिनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं या जिनके रिश्ते अपने पिता से थोड़े मुश्किल रहे हैं। यह दिन सिर्फ खुशियां मनाने का नहीं, बल्कि पुरानी यादों को ताजा करने, रिश्तों को समझने और शायद माफी देने या मांगने का भी हो सकता है। यह दिन उन सभी महिलाओं और पुरुषों को भी समर्पित है जो अकेले ही पिता की जिम्मेदारी निभा रहे हैं- जैसे सिंगल मदर्स (अकेली मां), बच्चों के संरक्षक या वो शिक्षक जो बच्चों को सही राह दिखाते हैं।

