बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। भारत ने पिछले एक दशक में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में विकास देखा है, जो पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय रसद नीति, भारतमाला, सागरमाला और उड़ान जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों के तहत समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण की सफलता को दिखाता है। यह जानकारी बुधवार को जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट में दी गई। यह रिपोर्ट पिछले 10 वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए निवेश से राजमार्गों, रेलवे, समुद्री और नागरिक उड्डयन क्षेत्रों में देश के परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए तेज बदलाव को दर्शाती है।रिपोर्ट में बताया गया है कि पीएम गतिशक्ति ने जीआईएस-आधारित प्लेटफॉर्म पर 44 मंत्रालयों और 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एकीकृत योजना बनाई है। 2021 में लॉन्च हुए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान भारत के आर्थिक क्षेत्रों में मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक व्यापक पहल है। इस एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से 100 लाख करोड़ रुपए का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
सात प्रमुख क्षेत्रों रेलवे, सडक़, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, जन परिवहन और रसद बुनियादी ढांचे पर आधारित यह मंत्रालयों और राज्य सरकारों में समन्वित विकास को बढ़ावा देता है। पिछले दशक के दौरान भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की लंबाई 91,287 किलोमीटर से 60 प्रतिशत बढक़र 1,46,204 किलोमीटर हो गई, जिसमें राजमार्ग निर्माण की गति 2014 में 11.6 किलोमीटर प्रति दिन से बढक़र 34 किलोमीटर प्रति दिन हो गई। 2013-14 और 2024-25 के बीच सडक़ बुनियादी ढांचे में केंद्र के निवेश में 6.4 गुना वृद्धि हुई है।
2014 से 2023-24 तक सडक़ परिवहन और राजमार्ग बजट में 570 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
2014 से भारतीय रेलवे के बजट में नौ गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 333 जिलों को कवर करने वाली नई वंदे भारत सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों की शुरुआत से उच्च निवेश दिखाई देता है। देश में वर्तमान में कुल 68 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं, जबकि 400 अन्य विश्व स्तरीय वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण की योजना है। 2014 से अब तक 31,000 किलोमीटर से अधिक नई पटरियां बिछाई गई हैं और 2014 से अब तक 45,000 किलोमीटर से अधिक पटरियों का नवीनीकरण किया गया है। ट्रैक नेटवर्क के विद्युतीकरण की गति 2004-14 के बीच 5,188 रूट किलोमीटर से बढक़र 2014-25 में 45,000 से अधिक रूट किलोमीटर तक पहुंच गई है।रिपोर्ट में कहा गया है कि विद्युतीकरण से रेलवे को (फरवरी 2025 तक) 2,960 करोड़ रुपए की वार्षिक बचत हुई है, जिससे वित्तीय दक्षता में वृद्धि हुई है।
इसमें आगे बताया गया है कि पिछले 10 वर्षों में देश की बंदरगाह क्षमता दोगुनी होकर 2,762 एमएमटीपीए हो गई है, साथ ही जहाजों के लिए कुल टर्नअराउंड समय 93 से 49 घंटे तक सुधर गया है। बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए सागरमाला के तहत 277 परियोजनाएं पूरी की गई हैं। रिपोर्ट में बंदरगाह क्षेत्र में पूरी की गई प्रमुख परियोजनाओं की भी सूची दी गई है, जिसमें विझिनजाम इंटरनेशनल डीपवाटर मल्टीपर्पज सीपोर्ट भी शामिल है। 2 मई, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किया जाने वाला यह 8,800 करोड़ रुपए की परियोजना भारत का पहला समर्पित कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है।

