गणतंत्र की स्थापना के आज 75 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। भारत में आज ७६ वां रिपब्लिक डे हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। जगह-जगह तिरंगा लहराएगा और कई कार्यक्रम भी होंगे। 26 जनवरी,1950 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण कर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया। यह ऐतिहासिक क्षणों में गिना जाने वाला समय था। इसके बाद से हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि आजादी के समय चर्चिल समेत बहुत लोगों ने भविष्यवाणी की थी कि कुछ ही समय में हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और लड़ाई झगड़े में लुप्त हो जाएगा। हमने न केवल हमारे अशुभ की कामना करने वालों को गलत साबित कर दिया बल्कि अस्थिरता के समुद्र में स्थिरता और प्रगति की मिसाल कायम कर दी। गणतंत्र होने का भारत के लिए बहुत गहरा और महत्वपूर्ण अर्थ है। यह सिर्फ एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के मूल्यों, इतिहास और भविष्य की दिशा को परिभाषित करता है। गणतंत्र ने भारत को अपनी राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक नीतियों को खुद तय करने का अधिकार दिया है। इसी की मार्फत देश में एक लोकतांत्रिक प्रणाली की स्थापना की गई, जिसमें जनता को अपने प्रतिनिधियों को चुनने का हक मिला। भारत में संविधान लागू होने के बाद सभी वयस्क नागरिकों को वोट देने का अधिकार मिला। क्या यह सब सामान्य बातें हैं? गणतंत्र देश बनने के बाद सरकार लोगों के प्रति उत्तरदायी बनी और उसे नियमित चुनावों के माध्यम से अपनी नीतियों का हिसाब देना होता है। क्या यह सब राजशाही या गोरी सरकार के समय संभव था… नहीं। गणतंत्र ने कानून के शासन की स्थापना की, जिसमें सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं। नागरिकों को मौलिक अधिकार मिले, जैसे कि समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार आदि। ये अधिकार सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के प्राप्त हैं। इन अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है और कानून सभी नागरिकों को इन अधिकारों की रक्षा करता है। गणतंत्र बनने से भारत में कानून का शासन लागू हो गया। इसी के साथ देश में कानून के शासन की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।

