Tuesday, July 14, 2026 |
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Hormuz संकट से फिर बढ़ा वैश्विक तनाव

दिग्गज अर्थशास्त्री Montek Singh Ahluwalia ने भारत को किया Alert

by Business Remedies
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नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क | अमरीका और ईरान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध अब दुनिया के लिए एक बड़े आर्थिक संकट में तब्दील होता जा रहा है। अमरीका के ताबड़तोड़ हवाई और सैन्य हमलों के जवाब में ईरान ने अपना पुराना और सबसे आक्रामक रुख अपनाते हुए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग- Strait of Hormuz को पूरी तरह से बंद कर दिया है। ईरान के इस कदम से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे एक बार फिर वैश्विक तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस बीच, भारत के दिग्गज अर्थशास्त्री और Planning Commission के पूर्व डिप्टी चेयरमैन Montek Singh Ahluwalia ने भारत सरकार को इस संकट को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है और देश को अलर्ट पर रहने को कहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है भारत के लिए होर्मुज रूट

Strait of Hormuz दुनिया की कुल तेल जरूरत के लगभग 20 फीसदी (20 प्रतिशत) हिस्से की आपूर्ति के लिए एकमात्र और सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है। खाड़ी देशों (जैसे Saudi Arabia, UAE, Kuwait और Iraq) से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर दुनियाभर के बाजारों में पहुंचता है। ईरान द्वारा इस रूट को ब्लॉक किए जाने के बाद से कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह ब्लॉकेड लंबा खिंचा तो वैश्विक मंदी का खतरा और गहरा हो जाएगा।

पिछले 100 दिनों के तनाव का दंश झेल रहा भारत

यह पहली बार नहीं है जब इस युद्ध ने दुनिया की सांसें रोक दी हैं। इससे पहले भी करीब 100 दिनों से ज्यादा समय तक चले भीषण युद्ध के दौरान जब Strait of Hormuz रूट बाधित हुआ था, तब India, Pakistan, Bangladesh, United Kingdom और South Korea जैसे देशों को भयंकर गैस और तेल संकट का सामना करना पड़ा था। उस दौरान वैश्विक स्तर पर एलपीजी की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई थी। इसके चलते घरेलू बाजारों में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के भाव आसमान छूने लगे थे। अब एक बार फिर वही पुराना खतरा दोबारा मंडराने लगा है।

भारत बढ़ाए स्टोरेज क्षमता : Montek Singh Ahluwalia

इस गंभीर संकट पर देश के जाने-माने अर्थशास्त्री Montek Singh Ahluwalia ने एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने आगाह किया है कि भारत को इस संकट से निपटने के लिए अपनी सामरिक तेल भंडारण क्षमता को तत्काल प्रभाव से बढ़ाना होगा। हालांकि, Ahluwalia ने भारत सरकार की सराहना करते हुए कहा कि पिछले संकट के दौरान भारत ने स्थिति को बहुत ही शानदार और सूझबूझ वाले तरीके से संभाला था, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए अब दीर्घकालिक उपायों पर काम करना बेहद जरूरी हो गया है।

भारत के प्लान-बी ने बचाया था संकट से

Montek Singh Ahluwalia के अनुसार, Strait of Hormuz जैसे जरूरी समुद्री रूट में रुकावट ने इस बात को पूरी तरह उजागर कर दिया है कि भारत को अलग-अलग स्रोतों से एनर्जी सप्लाई हासिल करने और एक बड़े घरेलू भंडार को बनाए रखने की कितनी सख्त जरूरत है। पिछले संकट के समय भारत सरकार ने अपने प्लान-बी के तहत रणनीतिक कदम उठाए थे, जिसमें शामिल थे:

  1. आयात स्रोतों में विविधता : भारत ने केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय Russia, Africa और अन्य देशों से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया था।
  2. घरेलू प्रोडक्शन में इजाफा : देश के भीतर ऊर्जा उत्पादन को गति दी गई।
  3. रणनीतिक सूझबूझ : संकट के समय आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए समय रहते अन्य वैकल्पिक मार्गों और समझौतों पर काम किया गया।

भारत के सामने चुनौतियां

भले ही भारत ने पिछले संकट को कुशलता से संभाल लिया हो, लेकिन ईरान-अमरीका के बीच दोबारा भड़के इस युद्ध ने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यदि Strait of Hormuz रूट लंबे समय तक बंद रहता है तो भारत के चालू खाता घाटे पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जिससे रुपया कमजोर हो सकता है और देश में एक बार फिर महंगाई बढ़ सकती है। दिग्गज अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अब समय आ गया है जब भारत को युद्ध स्तर पर अपनी अंडरग्राउंड तेल भंडारण क्षमताओं को दोगुना करना होगा ताकि किसी भी वैश्विक आपातकाल की स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक न लगे।

  • भारत सरकार इस समय इस संकट को देखते हुए व्यवस्थाओं को सुचारू रखने की कोशिश कर रही है। सरकार ने सभी को आश्वासन दे रखा है कि रिटेल कस्टमर को कोई मुश्किल नहीं आने देंगे। इसके अलावा अधिकतम स्टॉक को मेंटेन रखेंगे। इसके अलावा अपनी स्टॉक कैपेसिटी अच्छी है और हम तेल को दूसरे देशों को निर्यात भी कर रहे हैं। अगर संकट बढ़ा तो भारत सरकार एक्सपोर्ट पर रोक लगाकर घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ा सकती है।
  • Sandeep Bhageria, कोषाध्यक्ष, Rajasthan Petroleum Dealers Association


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