Washington,
अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत बने हुए हैं, लेकिन इसके साथ ही अमेरिका को भारत के साथ व्यापार में बड़ा घाटा भी झेलना पड़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 महीनों में अमेरिका का भारत के साथ वस्तु व्यापार घाटा 54.91 अरब डॉलर रहा, जिससे भारत अमेरिका के प्रमुख घाटा साझेदार देशों में शामिल हो गया है।
फरवरी में कुल व्यापार घाटा बढ़ा
ताजा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी महीने में अमेरिका का कुल व्यापार घाटा बढ़कर 57.35 अरब डॉलर हो गया, जो जनवरी के मुकाबले 2.67 अरब डॉलर अधिक है। हालांकि यह पिछले 12 महीनों के औसत से 11 प्रतिशत कम रहा। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण आयात में तेजी से वृद्धि होना रहा, जबकि निर्यात अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ा। फरवरी के दौरान अमेरिका का कुल निर्यात 314.8 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 372.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वस्तु व्यापार के क्षेत्र में अमेरिका को 84.60 अरब डॉलर का घाटा हुआ, जबकि सेवा क्षेत्र में 27.26 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया। हालांकि सेवा क्षेत्र का अधिशेष भी जनवरी की तुलना में थोड़ा कम हुआ है।
भारत के साथ व्यापार का योगदान
फरवरी महीने में ही अमेरिका को भारत के साथ लगभग 3.5 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार घाटा हुआ। वहीं, फरवरी 2026 तक के 12 महीनों की अवधि में भारत का हिस्सा अमेरिका के कुल वस्तु व्यापार घाटे में लगभग 5.01 प्रतिशत रहा, जो दोनों देशों के बीच स्थिर व्यापारिक प्रवाह को दर्शाता है। अमेरिका ने इस अवधि में भारत से कुल 101.97 अरब डॉलर का आयात किया। इससे स्पष्ट होता है कि भारत अमेरिकी बाजार को औषधि उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत से होने वाले आयात पर अमेरिका ने 12.34 अरब डॉलर का सीमा शुल्क संग्रह किया, जिसमें औसत शुल्क दर 12.12 प्रतिशत रही। वहीं फरवरी महीने में कुल आयात शुल्क संग्रह 21.24 अरब डॉलर रहा, जो 12 महीने के औसत से लगभग 13 प्रतिशत कम है। औसत शुल्क दर 8.48 प्रतिशत दर्ज की गई।
अन्य देशों के साथ भी बड़ा घाटा
अमेरिका का कुल व्यापार घाटा मुख्य रूप से मेक्सिको, वियतनाम और चीन जैसे देशों के साथ अधिक बना हुआ है, जो इस असंतुलन के प्रमुख कारण हैं। पिछले एक वर्ष में अमेरिका के प्रमुख निर्यात में नागरिक विमान, औषधि उत्पाद और गैर-मौद्रिक सोना शामिल रहे। वहीं आयात की बात करें तो औषधि उत्पाद, कंप्यूटर और यात्री वाहन प्रमुख रहे। हालांकि फरवरी में घाटा बढ़ा है, लेकिन दीर्घकालिक रुझान कुछ राहत के संकेत देते हैं। चालू वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में व्यापार घाटा कम हुआ है, जहां निर्यात में वृद्धि और आयात में कमी दर्ज की गई है।

