बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। भारत ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) के कार्बन कर जैसे एकतरफा पर्यावरणीय उपाय समानता के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं और समतापूर्ण विश्व व्यापार में बाधा डालते हैं। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश जलवायु और पर्यावरण अनुकूल विकास रणनीतियों को विकसित करने तथा सीबीएएम (कार्बन सीमा समायोजन तंत्र) जैसे एकतरफा उपायों का जवाब देने के मामले में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने तीसरे वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए कहा, “एकतरफा पर्यावरणीय उपाय समानता और साझा जिम्मेदारियों के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं और न्यायसंगत विश्व व्यापार में बाधा डालते हैं।” भारत ने विभिन्न मंचों पर यूरोपीय संघ के कुछ क्षेत्रों द्वारा कार्बन कर लगाने के फैसले पर अपनी चिंता जताई है क्योंकि इससे देश के निर्यात पर असर पड़ेगा। भारत इस विषय पर यूरोपीय संघ के साथ चर्चा कर रहा है। यूरोपीय संघ ने सीबीएएम या कार्बन कर लगाने का फैसला किया है, जो एक जनवरी, 2026 से लागू होगा। इसे शुरूआत में इस्पात, सीमेंट, उर्वरक, एल्यूमीनियम और हाइड्रोकार्बन उत्पादों सहित सात कार्बन-गहन क्षेत्रों पर लगाया जाएगा।

