देश में आज कोचिंग इंडस्ट्री की बाढ़-सी आई हुई है। करीब-करीब सभी राज्यों में यही हाल है। अधिकांश कोचिंग संस्थान बिना नियम कायदों के चल रही हैं। दिल्ली में हुए हादसे के बाद कोचिंग इंडस्ट्री सवालों के घेरे में आ गई है। छात्रों से ज्यादा फीस वसूलने, छात्रों पर ज्यादा तनाव थोपने जैसी समस्याओं को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग सेंटरों के लिए 16 जनवरी, 2024 को गाइडलाइंस तो जारी की थी, लेकिन यह काफी नहीं। कोचिंग सेंटर अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान नहीं देते, नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस वजह से छात्रों की जान पर खतरा है। इसे हर हाल में रोकना होगा। केंद्र को राज्यों के साथ मिलकर छात्रों के हित वाली पॉलिसी पर काम करना होगा। देश में यह इंडस्ट्री इतनी तेजी से फैली है इसका अंदाजा जीएसटी कलेक्शन से भी लगा सकते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार-पांच साल में कोचिंग इंस्टिट्यूशन से मिलने वाले जीएसटी कलेक्शन में दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में जहां कोचिंग संस्थानों से 2240.73 करोड़ रुपए का जीएसटी कलेक्शन मिला, वहीं 2023-24 में यह संख्या बढक़र 5517.45 करोड़ हो गई है। वहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी यह माना गया है कि छात्रों के साथ-साथ उनके पैरंट्स बेहतर रिजल्ट के लिए कोचिंग को चुन रहे हैं। विषय को समझाने की जगह रटने पर फोकस कराया जा रहा है। समाधान के लिए नई शिक्षा नीति में रेगुलर फोरमेटिव असेसमेंट की सिफारिश की गई है। सिर्फ रटने और परीक्षा-केंद्रित तैयारी पर जोर देने वाली कोचिंग संस्कृति के प्रभाव को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही गई है। पैरंट्स व छात्रों पर कोचिंग का बुखार इस कदर हावी है कि वे डमी स्कूलों में चले जाते हैं। डमी स्कूलों में जाकर एडमिशन ले लेते हैं और क्लास कोचिंग में लेते हैं। जबकि स्कूल जाने से बच्चा ज्यादा सीखता है, उस पर तनाव कम हावी होता है। जहां वर्ष, 2024 में सरकार ने जेईई मेन के साथ-साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2024 के सिलेबस में भी कटौती की थी। बड़े एंट्रेस टेस्ट बोर्ड स्तर की परीक्षाओं में पढ़े गए कोर सब्जेक्ट के आधार पर कराए गए हैं। यानी बोर्ड क्लासेज में अच्छी तरह से पढऩे वाले छात्र इन बड़े एंट्रेंस टेस्ट को बिना कोचिंग के भी क्रैक कर सकते हैं। जेईई एक वर्ष में दो बार होती है ताकि छात्र बेस्ट स्कोर चुन सके। सीयूईटी, जेईई और नीट देश की 13 भारतीय भाषाओं में कराई जाती है। अब सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए हाई लेवल कमिटी भी बनाई है, जो तीन स्तर की रणनीति पर काम कर रही है।

