बिजनेस रेमेडीज/मुंबई। क्रूड ऑयल में तेजी के कारण भारतीय मुद्रा, डॉलर के मुकाबले पहली बार सोमवार को 92 के पार यानि रुपया 92.35 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया है। दिन के अंत में ये 92.35 पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। पिछले बंद से ये 53 पैसे नीचे गिरा। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.22 पर खुला था, थोड़ी देर के लिए 92.15 तक चढ़ा, लेकिन फिर लगातार गिरता चला गया। शुक्रवार को यह 91.82 पर बंद हुआ था, तब भी 18 पैसे की गिरावट आई थी। वहीं इसी कारण से भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,352.74 अंक या 1.71 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,566.16 और निफ्टी 422.40 अंक या 1.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,028.05 पर बंद हुआ।
विदेशी निवेशकों के पैसे निकालने से बढ़ता दबाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसके साथ ही डॉलर भी मजबूत होता जा रहा है। घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली और विदेशी निवेशकों के पैसे निकालने से रुपए पर और दबाव पड़ गया है।
तेल की कीमतें सौ डॉलर प्रति बैरल के पार
एशियाई कारोबार के दौरान कू्रड ऑयल की कीमतों में करीब 2६ फीसदी तक उछाल देखा गया। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की वजह से यह स्थिति बनी है। ऑयल की कीमतें 1१९ डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो 2022 के बाद पहली बार देखने को मिली है।
ऑटो और बैंकिंग शेयरों से मार्केट में गिरावट
सोमवार को मार्केट में गिरावट का नेतृत्व ऑटो और बैंकिंग शेयरों ने किया। निफ्टी ऑटो 4.10 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 3.97 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल 2.81 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 2.78 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 2.60 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 2.39 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 2.37 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 2.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। केवल निफ्टी आईटी 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
एमएससीआई सूचकांक चार फीसदी गिरा
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों का एमएससीआई सूचकांक करीब 4 फीसदी गिर गया, जबकि वॉल स्ट्रीट के फ्यूचर्स भी कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहे थे। बॉन्ड बाजार में भी दबाव दिखा। 10 साल की बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड लगभग 4 आधार अंक बढ़ गई। टोक्यो से लेकर ब्रिटेन तक बॉन्ड बाजारों में गिरावट देखी गई, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढऩे का डर बढ़ गया है।
महंगाई पर नहीं पड़ेगा असर: निर्मला सीतारमण
वहीं भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है दुनिया भर में तेल की कीमतें बढऩे के बावजूद भारत में महंगाई पर इसका बड़ा असर पडऩे की उम्मीद नहीं है। जनवरी में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 2.75 फीसदी रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 2 फीसदी से 6 फीसदी वाले लक्ष्य दायरे के निचले हिस्से के करीब है। हालांकि इसके बावजूद रुपए पर दबाव साफ नजर आ रहा है। डॉलर-रुपया फॉरवर्ड प्रीमियम बढ़ गए हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि बाजार में आगे रुपये के कमजोर होने का जोखिम माना जा रहा है।

